हेल्थकेयर सेक्टर में निवेश करने वाली फर्म W Health Ventures ने अपने दूसरे फंड के लिए **₹700 करोड़** जुटा लिए हैं। कंपनी ने अपने **₹630 करोड़** के शुरुआती लक्ष्य को पार कर लिया है।
फंड का इस्तेमाल कैसे होगा?
मुंबई स्थित W Health Ventures अब इस फंड के जरिए अगले 4 साल में 8 से 10 नए हेल्थकेयर स्टार्टअप्स को तैयार करने की योजना बना रही है। यह फर्म पारंपरिक वेंचर कैपिटल फर्मों से अलग है, जो पहले से मौजूद कंपनियों में पैसा लगाती हैं। यह कंपनी खुद ही 'वेंचर बिल्डर' की तरह काम करती है, जहाँ स्टार्टअप्स को 'प्री-आइडिया' स्टेज से शून्य से बनाया जाता है।
क्या है काम करने का तरीका?
इस मॉडल में फर्म की टीम के पास डॉक्टर्स, टेक्नोलॉजिस्ट और बिजनेस ऑपरेटर्स शामिल होते हैं। ये लोग 12 से 18 महीने का समय सिर्फ हेल्थकेयर सिस्टम की समस्याओं को पहचानने में लगाते हैं। इसके बाद वे फाउंडर्स को नियुक्त करते हैं। फर्म का उद्देश्य भारतीय बाजार और US-इंडिया क्रॉस-बॉर्डर कॉरिडोर की खामियों को दूर करना है।
अब तक फर्म ने Everhope Oncology और Everbright Health जैसे वेंचर्स को लॉन्च किया है। इनमें से पहली कंपनी Narayana Health के साथ मिलकर कैंसर केयर पर काम कर रही है, जबकि दूसरी डिप्रेशन के इलाज पर केंद्रित है।
जोखिम और चुनौतियां
इस मॉडल में एग्जीक्यूशन की जटिलता सबसे बड़ी चुनौती है। चूंकि फर्म शुरुआत से ही जुड़ी होती है, इसलिए इसकी पूरी सफलता टीम की समझदारी और सही लीडरशिप चुनने पर टिकी है। इसके अलावा, हेल्थकेयर सेक्टर में रेगुलेटरी कड़ाई और क्लीनिकल अप्रूवल की लंबी प्रक्रियाएं निवेश की राह में देरी पैदा कर सकती हैं। चूंकि यह एक प्राइवेट फंड है, इसलिए इसमें लिक्विडिटी की कमी होती है और निवेशकों का पैसा लंबे समय तक के लिए लॉक हो जाता है।
