Viyash Scientific के मर्जर के बाद पहली तिमाही के नतीजे: रेवेन्यू चमका, पर प्रॉफिट और वैल्यूएशन पर सवाल
नया-नया बना Viyash Scientific, जो SeQuent Scientific और Viyash Lifesciences के बड़े मर्जर का नतीजा है, उसने दिसंबर तिमाही के अपने पहले फाइनेंशियल नतीजे जारी किए हैं। रिपोर्ट में सेल्स (Revenue) में तगड़ी ग्रोथ और EBITDA में बड़ी बढ़ोतरी साफ दिख रही है, जो ₹8,000 करोड़ के कंसॉलिडेशन (Consolidation) से उम्मीद की जा रही सिनर्जी (Synergies) के दिखने का संकेत दे रही है। हालांकि, कंपनी के इस पहले परफॉर्मेंस पर प्रॉफिट में अस्थिरता और बाजार के हावी वैल्यूएशन (Valuation) के कारण थोड़ी सावधानी बरती जा रही है, जिस पर निवेशकों की पैनी नजर है।
सिनर्जी का दम: नंबर्स में दिखी मर्जर की ताकत
दिसंबर तिमाही में Viyash Scientific ने ₹858 करोड़ का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 11% ज्यादा है। इससे भी खास बात यह है कि EBITDA में 64% का शानदार उछाल आया और यह ₹185 करोड़ पर पहुंच गया। ये आंकड़े मर्जर के बाद प्रभावी कॉस्ट मैनेजमेंट (Cost Management) और ऑपरेशनल इंटीग्रेशन (Operational Integration) को दिखाते हैं। कंपनी के खुलासों के मुताबिक, इस तिमाही में नेट प्रॉफिट ₹48 करोड़ रहा, जो पिछले साल की तुलना में 15% की बढ़ोतरी है। कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और ग्रुप सीईओ, डॉ. हरि बाबू बोडेपुडी ने इसे "वन टीम" एप्रोच और इंटीग्रेशन के बाद उठाए गए स्ट्रैटेजिक कदमों का नतीजा बताया, जिसमें नए प्रोडक्ट लॉन्च, लागत में सुधार और बिजनेस यूनिट्स के बीच सिनर्जी पर जोर दिया गया। कंपनी मैनेजमेंट ने एक मजबूत बैलेंस शीट (Balance Sheet) और मार्केट पोजिशन का जिक्र किया, जो अगले 3 से 5 सालों में भविष्य के मार्केट अवसरों का फायदा उठाने में मदद करेगा।
इंटीग्रेटेड मॉडल पर बाजार की नजर
इस मर्जर के जरिए SeQuent के मजबूत एनिमल हेल्थ पोर्टफोलियो को Viyash की ह्यूमन हेल्थ एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट्स (APIs) और फॉर्मूलेशन (Formulations) में विशेषज्ञता के साथ जोड़ा गया है। इससे यह भारत की सबसे बड़ी एनिमल हेल्थ कंपनी बन गई है। इस इंटीग्रेटेड मॉडल का लक्ष्य ह्यूमन और एनिमल हेल्थ, दोनों सेगमेंट में R&D, मैन्युफैक्चरिंग और कमर्शियल सिनर्जी का फायदा उठाना है। भारतीय एनिमल हेल्थ मार्केट में अच्छी ग्रोथ का अनुमान है, जो 2035 तक $2.0 बिलियन तक पहुंच सकता है, जिसकी CAGR 11.5% रहने की उम्मीद है। वहीं, भारतीय API मार्केट के भी 2031 तक $22.18 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, जिसकी CAGR 7.74% रहेगी। यह ग्रोथ सरकारी सपोर्ट और ग्लोबल सप्लाई चेन में बदलावों से प्रेरित है। ये सेक्टर की मजबूती Viyash Scientific के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करती है, लेकिन कंपनी के खुद के परफॉर्मेंस पर भी बारीक नजर रखी जा रही है।
सवाल: प्रॉफिट में अस्थिरता और ऊंचे वैल्यूएशन की चिंता
रेवेन्यू और EBITDA के बड़े आंकड़ों के बावजूद, अंदरूनी विश्लेषण में प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) और वैल्यूएशन (Valuation) को लेकर कुछ चिंताजनक रुझान दिख रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भले ही Q3 FY26 में ऑपरेटिंग मार्जिन 20.46% के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए, लेकिन कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट क्वार्टर-ऑन-क्वार्टर और ईयर-ऑन-ईयर घटा है। यह कंपनी की ओर से बताई गई नेट प्रॉफिट में बढ़ोतरी के बिल्कुल विपरीत है। कुछ विश्लेषणों में यह भी बताया गया है कि Q3 FY25 के ₹44.61 करोड़ के नेट प्रॉफिट की तुलना में Q3 FY26 में यह घटकर ₹38.44 करोड़ रह गया। इससे कमाई की निरंतरता पर सवाल उठते हैं।
प्रॉफिट में यह अस्थिरता, कंपनी के लगभग ₹9,121 करोड़ के मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Capitalization) और 206x के पिछले बारह महीनों के P/E रेशियो (P/E Ratio) के साथ मिलकर, एक बहुत ही स्ट्रेच्ड (Stretched) वैल्यूएशन का संकेत देता है। तुलना के लिए, बड़ी फार्मा कंपनियों जैसे Sun Pharma का P/E 37.4x और Dr. Reddy's Laboratories का P/E 18.7x है।
बाजार ने भी इन चिंताओं पर प्रतिक्रिया दी, जिसके चलते 6 फरवरी 2026 को नतीजे आने के बाद Viyash Scientific के शेयर 3.92% गिर गए। एनालिस्ट सेंटीमेंट (Analyst Sentiment) भी मिला-जुला है, MarketsMOJO ने 'होल्ड' (Hold) रेटिंग दी है, जबकि इससे पहले जनवरी 2026 के मध्य में 'सेल' (Sell) रेटिंग दी गई थी। सीईओ डॉ. हरि बाबू बोडेपुडी के पास ग्लोबल फार्मा ऑपरेशंस का लंबा अनुभव है, लेकिन कंपनी की यह क्षमता कि वह रेवेन्यू ग्रोथ को लगातार बॉटम-लाइन परफॉर्मेंस में बदल सके और अपने प्रीमियम वैल्यूएशन को सही ठहरा सके, एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। हालांकि, नेट डेट को LTM EBITDA के मुकाबले 0.7x तक लाने के प्रयास (जो Q2 FY25 में 1.4x था) एक सकारात्मक कदम है।
आगे की राह
मैनेजमेंट अगले 3 से 5 सालों में मार्केट के अवसरों का लाभ उठाने को लेकर उत्साहित है, और इसके लिए एक मजबूत बैलेंस शीट (Balance Sheet) और मार्केट पोजिशन का हवाला देता है। कंपनी को उम्मीद है कि R&D, मैन्युफैक्चरिंग और मर्जर से मिलने वाली फ्रंट-एंड सिनर्जी से फायदा मिलता रहेगा। Viyash Scientific दो हाई-ग्रोथ वाले सेक्टर्स - एनिमल हेल्थ और फार्मास्युटिकल्स - में रणनीतिक रूप से स्थित है। ऑपरेशंस को इंटीग्रेट करने, नए प्रोडक्ट्स लॉन्च करने और लागतों को मैनेज करने पर लगातार फोकस, टिकाऊ प्रॉफिटेबिलिटी हासिल करने और प्रतिस्पर्धी भारतीय व ग्लोबल फार्मास्युटिकल परिदृश्य में आगे बढ़ने के लिए महत्वपूर्ण होगा। निवेशकों द्वारा कंपनी की क्षमता पर कड़ी नजर रखी जाएगी कि वह प्रॉफिट में अस्थिरता के बीच अपने हाई वैल्यूएशन प्रीमियम को कैसे मैनेज करती है।