Vivodyne का AI ड्रग डिस्कवरी में बड़ा कदम: खोला बायोलॉजिकल डेटा सेंटर

HEALTHCAREBIOTECH
Whalesbook Logo
AuthorKaran Malhotra|Published at:
Vivodyne का AI ड्रग डिस्कवरी में बड़ा कदम: खोला बायोलॉजिकल डेटा सेंटर

बायोटेक स्टार्टअप Vivodyne ने 12 रोबोटिक लैब्स वाला एक बड़ा फैसिलिटी लॉन्च किया है, जिसका लक्ष्य AI मॉडल की सटीकता को बेहतर बनाने के लिए इंसानी जैविक डेटा तैयार करना है। कंपनी जानवरों पर होने वाले टेस्ट को लैब में विकसित मानव ऊतक (human tissue) से बदलने की तैयारी में है।

AI ड्रग डिस्कवरी की बड़ी चुनौती का समाधान

कैलिफोर्निया के सैन फ्रांसिस्को बे एरिया में, बायोटेक कंपनी Vivodyne ने अपना नया बायोलॉजिकल डेटा सेंटर खोला है। यह फैसिलिटी 12 रोबोटिक HIVE लैब्स से लैस है, जहाँ लैब में उगाए गए मानव ऊतकों (human tissues) पर बड़े पैमाने पर प्रयोग किए जा सकते हैं। यह कदम ग्लोबल फार्मा इंडस्ट्री के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि अभी लगभग 90% दवाएं जो जानवरों पर टेस्ट में सफल होती हैं, इंसानों पर फेल हो जाती हैं।

AI के लिए डेटा की सटीकता क्यों ज़रूरी है?

मेडिसिन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसके एल्गोरिदम को ट्रेन करने के लिए इस्तेमाल होने वाले डेटा की क्वालिटी है। ज़्यादातर मौजूदा AI मॉडल जानवरों के डेटा या अलग-थलग कोशिकाओं (isolated cells) पर ट्रेन किए जाते हैं, जो इंसानी शरीर के जटिल वातावरण को ठीक से नहीं दर्शा पाते। Vivodyne का तरीका 'कॉज़ल बायोलॉजिकल डेटा' बनाकर इस समस्या को दूर करने का प्रयास करता है। 20 अलग-अलग तरह के मानव ऊतकों को विकसित करके और हजारों ऑटोमेटेड प्रयोग चलाकर, HIVE सिस्टम AI मॉडल को दवा की सुरक्षा और प्रभावशीलता का सटीक अनुमान लगाने के लिए ज़रूरी इंसानी-संबंधित डेटा प्रदान करेगा।

यह हेल्थकेयर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के संगम पर नज़र रखने वाले निवेशकों के लिए एक बड़ा संकेत है। Vivodyne का लक्ष्य फार्मा डेवलपर्स को दवा उम्मीदवारों (drug candidates) को शुरुआती चरण में ही मानव ऊतकों पर टेस्ट करने में मदद करना है, जिससे क्लिनिकल ट्रायल्स पर लगने वाले समय और पैसे की बचत हो सके।

इंडस्ट्री के जोखिम और प्रतिस्पर्धा

हालांकि यह तकनीक एक बड़ी इंडस्ट्री की बाधा को दूर करने का वादा करती है, लेकिन इसमें बड़े जोखिम भी हैं। Vivodyne अभी एक प्राइवेट, प्री-क्लिनिकल स्टेज की कंपनी है। यह किसी भी एक्सचेंज पर लिस्टेड नहीं है, इसलिए सीधे तौर पर इसके शेयर में निवेश का कोई रास्ता नहीं है। कई बायोटेक स्टार्टअप्स की तरह, कंपनी के सामने एक्जीक्यूशन का जोखिम है, क्योंकि इसकी तकनीक को विभिन्न रोगों के प्रकारों में इंसानी शरीर की कार्यप्रणाली को सटीक रूप से दर्शाने में सफल होना होगा।

इसके अलावा, 'ऑर्गन-ऑन-ए-चिप' (organ-on-a-chip) और मानव-ऊतक मॉडल के क्षेत्र में Vivodyne अकेली नहीं है। Emulate, CN Bio, और Hesperos जैसी स्थापित कंपनियाँ भी जानवरों के टेस्ट को बदलने के लिए इसी तरह की तकनीकें विकसित कर रही हैं। Vivodyne की मार्केट में अपनी जगह बनाने की क्षमता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह बड़ी फार्मा कंपनियों के साथ लंबे समय तक चलने वाली पार्टनरशिप हासिल कर पाती है या नहीं, और यह साबित कर पाती है कि उसके मॉडल मौजूदा तरीकों से इंसानी नतीजों का बेहतर अनुमान लगा सकते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.