हिमाचल प्रदेश के ड्रग रेगुलेटर्स ने Vantive के डायलिसिस सॉल्यूशन के दो बैच को 'नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी' घोषित किया है। सुरक्षा जांच में फेल होने और 9 तरह के रेगुलेटरी नियमों के उल्लंघन के कारण इन पर कार्रवाई की गई है।
हिमाचल प्रदेश के नियामक अधिकारियों ने इम्पोर्टेड पेरिटोनियल डायलिसिस सॉल्यूशन के दो बैच को 'नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी' करार दिया है। ये बैच अनिवार्य बैक्टीरियल एंडोटॉक्सिन टेस्टिंग में फेल हो गए थे। एम्स-बिलासपुर (AIIMS-Bilaspur) में इस्तेमाल के लिए भेजे गए इन बैचों की रिपोर्ट 3 सितंबर 2026 को जारी की गई, जिसे अब ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) को भेज दिया गया है।
यह मामला Vantive से जुड़ा है, जो पहले Baxter का रिनल डिवीजन हुआ करता था। बद्दी की एक सरकारी लैब की जांच में 9 अलग-अलग रेगुलेटरी उल्लंघन सामने आए हैं, जो भारत में इम्पोर्टेड मेडिकल सामानों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
नियमों की अनदेखी और लेबलिंग में चूक
जांच में मुख्य समस्या प्रोडक्ट के फॉर्मूलेशन स्टैंडर्ड्स को लेकर थी। दवा में भारतीय फार्माकोपिया 2022 के बजाय अमेरिकी मानकों का इस्तेमाल किया गया था। स्थानीय नियमों के अनुसार, भारत में बेचे जाने वाली हर दवा को भारतीय मानकों का पालन करना अनिवार्य है। सोडियम क्लोराइड, कैल्शियम क्लोराइड और मैग्नीशियम क्लोराइड जैसे तत्वों में गड़बड़ी के कारण इसे 'मिसब्रांडेड' माना गया है।
लेबलिंग में भी बड़ी चूक सामने आई है। पैकिंग पर स्टोरेज तापमान की सीमा, फ्रीजिंग से बचाव की चेतावनी और 'सिंगल डोज कंटेनर' की जानकारी गायब थी। इसके अलावा, जेनेरिक नाम की तुलना में ब्रांड नाम को प्रमुखता देना भी नियमों का उल्लंघन है। सबसे गंभीर बात यह रही कि पैकेजिंग पर इम्पोर्टर का नाम, पता और लाइसेंस नंबर तक साफ नहीं था, जिससे प्रोडक्ट की ट्रैकिंग मुश्किल हो गई है।
हेल्थकेयर इम्पोर्ट्स पर क्या होगा असर?
यह घटना भारत में इम्पोर्टेड मेडिकल डिवाइसेज और ड्रग्स को लेकर सख्त होते नियमों की ओर इशारा करती है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि क्या सरकार इन बैचों को पूरी तरह रिकॉल (Recall) करेगी या कंपनी के इम्पोर्ट प्रोसेस की और भी गहराई से ऑडिट की जाएगी।
