VINS Bioproducts और Neovii का करार: अब भारत में ही बनेगी ऑर्गन ट्रांसप्लांट की जरूरी दवा

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AuthorNeha Patil|Published at:
VINS Bioproducts और Neovii का करार: अब भारत में ही बनेगी ऑर्गन ट्रांसप्लांट की जरूरी दवा

भारत की VINS Bioproducts ने जर्मनी की Neovii Biotech के साथ हाथ मिलाया है। इस साझेदारी के तहत भारत में 'एंटी-थाइमोसाइट ग्लोब्युलिन' (anti-thymocyte globulin) का स्थानीय स्तर पर निर्माण किया जाएगा, जिससे विदेशी आयात पर निर्भरता कम होगी।

हैदराबाद स्थित VINS Bioproducts ने जर्मनी की Neovii Biotech के साथ एक नॉन-डिस्क्लोजर एग्रीमेंट (NDA) साइन किया है। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य 'एंटी-थाइमोसाइट ग्लोब्युलिन' जैसी महत्वपूर्ण बायोलॉजिकल दवाओं का देश में ही उत्पादन करना है। यह दवा मुख्य रूप से ऑर्गन ट्रांसप्लांट के बाद शरीर द्वारा अंग को रिजेक्ट न करने और ब्लड से जुड़ी गंभीर बीमारियों के इलाज में उपयोग की जाती है।

आयात पर निर्भरता होगी कम

फिलहाल, भारत इन हाई-एंड मेडिकल ट्रीटमेंट्स के लिए पूरी तरह से विदेशों पर निर्भर है। इस टेक्नोलॉजी ट्रांसफर से न केवल सप्लाई चेन मजबूत होगी, बल्कि लंबी अवधि में अस्पतालों और मरीजों के लिए इलाज का खर्च भी कम हो सकता है। यह पहल 'इंडो-जर्मन हेल्थ लीडरशिप डायलॉग' के दौरान भारतीय दूतावास की मदद से शुरू की गई, जो बायोटेक सेक्टर में 'आत्मनिर्भर भारत' की ओर एक बड़ा कदम है।

चुनौतियों का रास्ता

हालांकि यह पार्टनरशिप गेम-चेंजर साबित हो सकती है, लेकिन इसकी राह में कुछ तकनीकी चुनौतियां भी हैं। बायोलॉजिकल दवाओं के निर्माण के लिए एडवांस इंफ्रास्ट्रक्चर, कोल्ड-चेन लॉजिस्टिक्स और सख्त क्वालिटी कंट्रोल की जरूरत होती है। साथ ही, इन दवाओं को मार्केट में उतारने के लिए रेगुलेटरी अप्रूवल की प्रक्रिया से गुजरना होगा। निवेशक और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स अब इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और सरकारी मंजूरी मिलने में कितना समय लगेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.