मेडिकल सेक्टर में बड़ा बदलाव! अमेरिका का Utah राज्य दुनिया का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जहां एक AI सिस्टम को माइल्ड-टू-मॉडरेट एक्ने (मुंहासे) के लिए प्रिसक्रिप्शन जारी करने की मंजूरी दी गई है।
हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। अमेरिका का Utah राज्य अब दुनिया भर के लिए एक नजीर बन गया है, जहां 'Utah Office of Artificial Intelligence Policy' के तहत एक रेगुलेटरी सैंडबॉक्स (Regulatory Sandbox) का प्रयोग शुरू किया गया है। इसके जरिए एक AI सिस्टम को खास तौर पर त्वचा संबंधी समस्याओं के इलाज के लिए दवाएं लिखने की अनुमति मिली है। हालांकि, निवेशकों को यह याद रखना चाहिए कि इस पायलट प्रोजेक्ट को चलाने वाली कंपनी Nolla Health एक प्राइवेट फर्म है और यह अभी स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड नहीं है।
कैसे काम करेगा यह सिस्टम?
इस पूरे प्रोसेस को सुरक्षित बनाने के लिए एक 'टीयर्ड अप्रोच' (Tiered Approach) अपनाया जा रहा है। शुरुआत में, AI द्वारा लिखे गए हर एक प्रिसक्रिप्शन को एक लाइसेंस प्राप्त डॉक्टर द्वारा अनिवार्य रूप से वेरीफाई किया जाएगा। जैसे-जैसे यह सिस्टम अपनी सटीकता साबित करेगा, वैसे-वैसे डॉक्टर्स की भूमिका केवल 'रेट्रोस्पेक्टिव ऑडिट' तक सीमित कर दी जाएगी, यानी वे रैंडम सैंपल की जांच करेंगे।
हेल्थकेयर सेक्टर के लिए क्या हैं संकेत?
ग्लोबल मार्केट के नजरिए से देखें, तो यह रेगुलेटरी सैंडबॉक्स का कॉन्सेप्ट काफी महत्वपूर्ण है। यह सरकारों को बिना किसी बड़े रिस्क के नई टेक्नोलॉजी को आजमाने का मौका देता है। यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो आने वाले समय में टेलीमेडिसिन के क्षेत्र में खर्चों में भारी कटौती और डॉक्टर्स पर काम का दबाव कम होने की उम्मीद है।
चुनौतियां और भविष्य की राह
चिकित्सा विशेषज्ञों का एक वर्ग अभी भी इसे लेकर सतर्क है। आलोचकों का तर्क है कि जटिल बीमारियों या मरीज की मेडिकल हिस्ट्री को समझने में AI मानवीय डॉक्टर की जगह नहीं ले सकता। फिलहाल, निवेशकों के लिए इस प्रोजेक्ट के 'डेटा इंटीग्रिटी' (Data Integrity), 'एरर रेट' (Error Rates) और 'पेशेंट सेफ्टी' आउटकम्स पर नजर रखना सबसे जरूरी है। यह पायलट प्रोजेक्ट आने वाले वक्त में दुनिया भर के रेगुलेटर्स के लिए AI-आधारित हेल्थकेयर की दिशा तय करेगा।
