स्वास्थ्य सुविधाओं को मज़बूत करने की दिशा में बड़ा कदम
Union Budget 2026-27 में सार्वजनिक स्वास्थ्य, खासकर मानसिक स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं। इस बजट का मुख्य आकर्षण देश में दूसरे शीर्ष मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान संस्थान (National Institute of Mental Health and Neuro Sciences - NIMHANS-2) की स्थापना है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि यह कदम खास तौर पर उत्तर भारत में विशेषज्ञ उपचार और अनुसंधान सुविधाओं की कमी को पूरा करेगा, जहाँ अक्सर मरीजों को इलाज के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
मानसिक स्वास्थ्य ढांचे को मिलेगा बढ़ावा
NIMHANS-2 की स्थापना का उद्देश्य उन्नत मानसिक स्वास्थ्य देखभाल और अनुसंधान को विकेंद्रीकृत करना है। यह बेंगलुरु स्थित मौजूदा NIMHANS संस्थान के साथ मिलकर काम करेगा। इसके अलावा, रांची और Tezpur में स्थित राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों (National Mental Health Institutes) को भी अपग्रेड किया जाएगा। सरकार की यह रणनीति उन कमजोर वर्गों को सहारा देने के लिए है जो आर्थिक तनाव, आपात स्थितियों और सामाजिक झटकों से जूझ रहे हैं।
ट्रॉमा केयर में 50% का विस्तार
बजट में सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंडे का एक और अहम हिस्सा आपातकालीन और ट्रॉमा केयर सेवाओं का बड़ा विस्तार है। सरकार का इरादा पूरे देश के जिला अस्पतालों में समर्पित आपातकालीन और ट्रॉमा केयर सेंटरों के ज़रिए इन सेवाओं की क्षमता में 50% की वृद्धि करना है। यह कदम इस बात को स्वीकार करता है कि दुर्घटनाओं, आपदाओं और हिंसा का परिवारों पर, विशेषकर सीमित संसाधनों वाले लोगों पर, गहरा आर्थिक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ता है।
युवा वर्ग की मानसिक स्वास्थ्य चिंताएं'
बजट में 29 जनवरी, 2026 को किए गए एक सर्वे के निष्कर्षों को भी रेखांकित किया गया, जिसने मानसिक स्वास्थ्य को एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता के रूप में पहचाना। सर्वे में युवाओं के बीच सोशल मीडिया की लत, साइबरबुलिंग से संबंधित चिंता और अवसाद (Depression) की बढ़ती दरें देखी गईं। साथ ही, डिजिटल लत का अकादमिक प्रदर्शन और सामाजिक जुड़ावों पर व्यापक असर भी चिंता का विषय है। इन अंतर्दृष्टियों ने मानसिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे और सहायता प्रणालियों में सरकार के निवेश की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया है।