Reliance Life Sciences को बड़ा झटका: USFDA ने लगाई निर्यात पर रोक, क्वालिटी मानकों में भारी खामियां

HEALTHCAREBIOTECH
Whalesbook Logo
AuthorKaran Malhotra|Published at:
Reliance Life Sciences को बड़ा झटका: USFDA ने लगाई निर्यात पर रोक, क्वालिटी मानकों में भारी खामियां

अमेरिकी हेल्थ रेगुलेटर USFDA ने नवी मुंबई स्थित Reliance Life Sciences की फैसिलिटी पर बड़ा एक्शन लिया है। लैब डेटा की शुद्धता और स्टरिलिटी प्रोटोकॉल में कमी मिलने के कारण कंपनी के प्रोडक्ट्स पर इंपोर्ट अलर्ट जारी कर दिया गया है।

रेगुलेटर का कड़ा एक्शन

अमेरिकी ड्रग रेगुलेटर USFDA ने Reliance Life Sciences प्राइवेट लिमिटेड को एक फॉर्मल वॉर्निंग लेटर जारी किया है। यह कार्रवाई फरवरी 2026 में नवी मुंबई स्थित कंपनी की फैसिलिटी के इंस्पेक्शन के बाद की गई है। रेगुलेटर ने पाया कि कंपनी 'करेंट गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस' (CGMP) के मानकों का सही पालन नहीं कर रही थी।

क्यों लगी रोक?

इंस्पेक्शन के दौरान अमेरिकी इन्वेस्टिगेटर्स को लैब रिकॉर्ड्स की सत्यता (Data Integrity) में गंभीर खामियां मिलीं। एजेंसी का कहना है कि कंपनी ने जरूरी डेटा को पूरी तरह और सही ढंग से मेंटेन नहीं किया, जो दवाओं की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। इसके अलावा, इंजेक्टेबल दवाओं के लिए जरूरी स्टरिलिटी कंट्रोल में भी कमी पाई गई है।

एक्सपोर्ट पर असर और रिकॉल की कहानी

इन मैन्युफैक्चरिंग खामियों के चलते 9 जुलाई 2026 से नवी मुंबई फैसिलिटी से आने वाले सभी ड्रग प्रोडक्ट्स को 'इंपोर्ट अलर्ट 66-40' के तहत डाल दिया गया है। इससे अमेरिका में दवाओं की सप्लाई पूरी तरह रुक गई है। याद दिला दें कि इससे पहले जुलाई 2026 में कंपनी ने खुद भी अमेरिका में अपनी कुछ कैंसर दवाओं को बाजार से वापस (Recall) लिया था, जिसकी वजह 'स्टरिलिटी का भरोसा न होना' बताई गई थी।

क्या शेयर बाजार पर होगा असर?

Reliance Life Sciences एक प्राइवेट और अनलिस्टेड कंपनी है, इसलिए यह स्टॉक एक्सचेंज (NSE या BSE) पर ट्रेड नहीं करती। इसका मतलब है कि निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि इसका सीधा असर शेयर की कीमतों पर नहीं होगा। हालांकि, कंपनी के लिए यह एक बड़ा ऑपरेशनल संकट है।

आगे क्या होगा?

अमेरिका में फिर से एक्सपोर्ट शुरू करने के लिए कंपनी को USFDA के सभी कड़े मानकों को पूरा करना होगा। इसके लिए कंपनी को क्वालिटी सिस्टम को अपग्रेड करना होगा, इंटरनल ऑडिट्स करने होंगे और रेगुलेटर की अगली सफल इंस्पेक्शन रिपोर्ट का इंतजार करना होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.