टैरिफ का ऐलान, पर 'परंतु' के साथ
अमेरिकी सरकार ने नए व्यापार नीति के तहत पैटेंटेड दवाओं और उनके घटकों के आयात पर 100% तक का टैरिफ लागू किया है। यह कदम 'सेक्शन 232' के तहत उठाया गया है, जिसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर पब्लिक हेल्थ को बेहतर बनाने और विदेशी उत्पादन पर निर्भरता कम करने का बहाना बताया जा रहा है। छोटे और बड़े कंपनियों के लिए यह टैरिफ 120 से 180 दिनों के भीतर लागू होगा।
बड़ी मछलियों को बचाया, छोटे फंसे?
इस नई नीति में कई बड़ी छूटें (Exemptions) शामिल हैं, जिनकी वजह से बड़े फार्मा दिग्गज और प्रमुख व्यापारिक भागीदार सीधे तौर पर प्रभावित नहीं होंगे। यूरोपीय संघ (EU), जापान, दक्षिण कोरिया और स्विट्जरलैंड जैसे देशों को पुराने व्यापारिक समझौतों के कारण टैरिफ की सीमा 15% तक ही सीमित रहेगी। वहीं, यूनाइटेड किंगडम (UK) के साथ हुए हालिया समझौते के बाद टैरिफ शायद शून्य तक भी जा सकता है।
बड़ी कंपनियों का क्या होगा?
Merck & Co. (MRK), Eli Lilly and Company (LLY) और GSK Plc (GSK) जैसी बड़ी फार्मा कंपनियां अपनी मार्केट स्ट्रेंथ और मौजूदा समझौतों के दम पर इन बदलावों से निपटने की उम्मीद है। इन कंपनियों का मार्केट कैप अरबों डॉलर में है, और ये अक्सर नई कीमतों के समझौतों (Most Favored Nation Pricing) के जरिए सरकार से डील कर लेती हैं, जिससे वे शून्य टैरिफ का फायदा उठा सकती हैं। ऐसी डील करने वाली कंपनियों पर 20% टैरिफ लगेगा, जो चार साल में बढ़कर 100% हो जाएगा, जबकि सिर्फ ऑनशोरिंग (देश में उत्पादन) के वादे पर 20% टैरिफ लगेगा।
जेनेरिक दवाओं को फिलहाल राहत
खास बात यह है कि जेनेरिक दवाओं (Generic Drugs), बायोसिमिलर्स और कुछ विशेष दवाओं जैसे ऑर्फन ड्रग्स (Orphan Drugs) और एनिमल हेल्थ प्रोडक्ट्स को फिलहाल इस टैरिफ से बाहर रखा गया है। हालांकि, जेनेरिक दवाओं के स्टेटस की समीक्षा एक साल बाद की जाएगी।
इंडस्ट्री की चिंताएं और सप्लाई चेन पर खतरा
इंडस्ट्री के कई बड़े समूह, जैसे BIO, ने इस कदम की कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि इससे दवाओं की लागत बढ़ेगी, घरेलू उत्पादन में बाधा आएगी और नई दवाओं के विकास में देरी होगी। छोटी बायोटेक कंपनियों के लिए यह सबसे बड़ी चिंता है, क्योंकि उनके पास बड़े मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने के लिए पर्याप्त फंड नहीं होते। ऐसे में, वे या तो भारी लागत का सामना करेंगी या फिर मार्केट से बाहर हो जाएंगी।
विश्लेषकों का अनुमान है कि सालाना $274 अरब के ड्रग इंपोर्ट में से केवल $12 अरब पर ही 100% का पूरा टैरिफ लग सकता है, जो कि एक संकुचित असर दिखाता है। फार्मा सप्लाई चेन की जटिलता को देखते हुए, यह कदम एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (APIs) और तैयार उत्पादों के फ्लो में दिक्कत पैदा कर सकता है।
भविष्य का रास्ता
इस टैरिफ का अंतिम असर बातचीत, समझौतों और कंपनियों के अनुकूलन पर निर्भर करेगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन सी कंपनियां छूट हासिल करती हैं और छोटी कंपनियां बढ़ती लागतों का सामना कैसे करती हैं।