अमेरिका में AI-आधारित मेडिकल बिलिंग के चलते बीमा कंपनियों को **$942 मिलियन** का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ा है। Blue Cross Blue Shield Association की इस रिपोर्ट ने भारतीय IT और BPM सेक्टर की चिंताओं को बढ़ा दिया है, क्योंकि अब दावों की जांच और सख्त होने वाली है।
बिलिंग में 'कोडिंग डिस्कनेक्ट' का असर
अमेरिका में हॉस्पिटल बिलिंग में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है, लेकिन इसके परिणाम अब चिंताजनक हो रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 2 साल में मेडिकल कोडिंग के ऑटोमेशन के कारण स्वास्थ्य सेवा खर्च में $942 मिलियन की बढ़ोतरी हुई है। समस्या यह है कि ये AI टूल बिना मरीजों की स्थिति में बदलाव के ही बिलों को अधिक जटिल दिखा रहे हैं, जिसे इंश्योरेंस कंपनियां 'कोडिंग डिस्कनेक्ट' मान रही हैं।
भारतीय IT कंपनियों के लिए बड़ा रिस्क
भारत की कई बड़ी IT और BPM कंपनियां अमेरिका के लिए 'रेवेन्यू साइकिल मैनेजमेंट' (RCM) का काम संभालती हैं। ये कंपनियां मेडिकल कोडिंग, बिलिंग और क्लेम प्रोसेसिंग के लिए AI का धड़ल्ले से उपयोग कर रही हैं। अब बीमा कंपनियों के सख्त रुख के कारण, भारतीय कंपनियों को सिर्फ 'स्पीड' पर नहीं, बल्कि 'एक्यूरेसी' (Accuracy) पर ध्यान देना होगा। अगर बिलिंग में गड़बड़ी मिली, तो क्लेम रिजेक्शन बढ़ सकता है और पेमेंट साइकिल भी लंबी हो सकती है।
आगे क्या होगा?
इन्वेस्टर्स को इस 'सॉफ्टवेयर एजेंट वॉर' पर नजर रखनी चाहिए। आने वाले समय में, अमेरिका में रेगुलेटरी सख्ती बढ़ सकती है, जिससे भारतीय कंपनियों की लागत बढ़ सकती है। अब कंपनियों को ऐसे AI मॉडल विकसित करने होंगे जो अत्यधिक पारदर्शी और कंप्लायंस-फोकस्ड हों, अन्यथा मेडिकल बिलिंग का यह बिजनेस मॉडल कंपनियों के मार्जिन पर भारी पड़ सकता है।
