US की नई ड्रग प्राइसिंग पॉलिसी को लेकर चिंताएं थीं कि कहीं इसका भारतीय दवा कंपनियों पर बुरा असर न पड़े, लेकिन अब लगता है कि ऐसा होने की संभावना कम है। Systematix Group के फार्मा एनालिस्ट विशाल मनचंदा ने बताया कि इन नीतियों का मुख्य फोकस ब्रांडेड और पेटेंट वाली दवाओं पर रहने की उम्मीद है, न कि उन जेनेरिक दवाओं पर जो अमेरिकी स्वास्थ्य व्यवस्था का अहम हिस्सा हैं।
US पॉलिसी का फोकस: ब्रांडेड दवाएं निशाने पर
मनचंदा ने यह भी बताया कि इस बात को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है कि ऐसी टैरिफ लागू भी होंगी या नहीं। अगर टैरिफ लागू होते भी हैं, तो उनका असर उन्हीं कंपनियों पर सीमित रहेगा जिनकी ब्रांडेड दवाओं में हिस्सेदारी ज़्यादा है।
नई प्राइसिंग रूल्स के बीच Sun Pharma की भूमिका
Sun Pharmaceutical Industries, जो US में स्पेशियलिटी सेगमेंट में एक बड़ी कंपनी है, उसे अपने ग्लोबल साथियों की तरह प्राइसिंग एग्रीमेंट करने की ज़रूरत पड़ सकती है ताकि इस जोखिम से बचा जा सके।
जेनेरिक दवाएं क्यों सुरक्षित?
मनचंदा का मानना है कि जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ लगाना मुश्किल है, क्योंकि ये आवश्यक दवाएं अमेरिकी हेल्थकेयर सप्लाई चेन का एक क्रिटिकल हिस्सा हैं। जिन कंपनियों ने पहले ही US के साथ एग्रीमेंट कर रखे हैं, वे टैरिफ के जोखिम से बचते हुए परिचालन लाभ बनाए रखने में सफल रही हैं।
Sun Pharma पर एनालिस्ट का पॉजिटिव व्यू
विशाल मनचंदा Sun Pharma को लेकर पॉजिटिव आउटलुक रखते हैं। उनका कहना है कि कंपनी की US जेनेरिक पर निर्भरता कम हुई है और ब्रांडेड प्रोडक्ट्स का शेयर बढ़ा है। यह स्ट्रैटेजिक मिक्स कंपनी को अपने प्रतिस्पर्धियों की तुलना में ग्रोथ बनाए रखने में मदद करेगा। एक डाउनसाइड सिनेरियो में भी, कंपनी के EBITDA पर 2-3% तक का सीमित वित्तीय असर ही अनुमानित है।