अमेरिका की एक ग्रैंड जूरी ने दो भारतीय नागरिकों पर नकली Ozempic की तस्करी और वितरण करने का आरोप लगाया है। यह मामला वजन घटाने वाली दवाओं की बढ़ती मांग के बीच पनप रहे अवैध कारोबार और फार्मा कंपनियों के लिए बढ़ते रिस्क को उजागर करता है।
अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस के अनुसार, Swapnadip Roy और Vicky Ramancha नामक दो भारतीयों पर नकली दवाओं का नेटवर्क चलाने का आरोप है। यह गैंग चीन से डायबिटीज और वजन घटाने वाली नकली दवाएं मंगवाकर अमेरिकी ग्राहकों को बेचता था। यह अवैध कारोबार जुलाई 2023 से अप्रैल 2024 के बीच सक्रिय था।
फार्मा सेक्टर पर क्या है असर?
जब भी किसी दवा की मांग उसकी सप्लाई से ज्यादा होती है, तो अपराधी इसका फायदा उठाते हैं। Ozempic की भारी मांग का नतीजा यह है कि बाजार में नकली दवाओं की भरमार हो गई है। Novo Nordisk जैसी कंपनियों के लिए यह न सिर्फ मरीजों की सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि ब्रांड की साख और कानूनी खर्चों के लिहाज से भी बड़ी चुनौती है। ऐसी घटनाओं से कंपनियों को अपनी सप्लाई चेन सुरक्षित करने और एंटी-काउंटरफिटिंग तकनीक पर भारी निवेश करना पड़ता है।
रेगुलेटरी एक्शन और भविष्य की चुनौतियां
दिसंबर 2023 में US FDA ने नकली दवाओं की एक बड़ी खेप पकड़ी थी और सुरक्षा अलर्ट जारी किया था। इसके बावजूद आरोपियों ने अपना काम जारी रखा, जो बताता है कि ड्रग माफियाओं के जाल को तोड़ना कितना मुश्किल है।
फिलहाल, Swapnadip Roy को इटली से प्रत्यर्पित कर हिरासत में लिया गया है, जबकि Vicky Ramancha अभी फरार है। निवेशकों के लिए यह घटना फार्मा सेक्टर के उन छिपे हुए रिस्क को दिखाती है, जो सप्लाई चेन पारदर्शिता की कमी से पैदा होते हैं। भविष्य में कंपनियों को ट्रैक-एंड-ट्रेस तकनीक और ग्राहकों को जागरूक करने पर अधिक खर्च करना होगा ताकि वे अपनी मार्केट शेयर बचा सकें।
