UK की Medicines and Healthcare products Regulatory Agency (MHRA) ने AI टूल्स के लिए एक नया 'L-plate' अप्रूवल सिस्टम पेश किया है। इसके तहत अब AI मेडिकल टूल्स को कड़ी निगरानी के बीच क्लिनिक में इस्तेमाल की अनुमति मिलेगी, जिससे इनोवेशन की रफ्तार तेज होगी।
नया अप्रूवल सिस्टम और बदलाव
UK की Medicines and Healthcare products Regulatory Agency (MHRA) ने नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को तेजी से अपनाने के लिए एक नया रोडमैप तैयार किया है। इसे 'L-plate' सिस्टम का नाम दिया गया है, जो बिल्कुल लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस की तरह काम करेगा। अब किसी AI मॉडल को फाइनल अप्रूवल का इंतजार नहीं करना होगा, बल्कि उसे क्लिनिकल सेटिंग में सख्त रियल-टाइम निगरानी के साथ टेस्ट किया जाएगा।
भारतीय IT सेक्टर पर असर
यह खबर भारतीय निवेशकों के लिए अहम है क्योंकि TCS, Infosys और Wipro जैसी दिग्गज IT कंपनियां लंबे समय से NHS के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन प्रोजेक्ट्स से जुड़ी हैं। नया और तेज रेगुलेटरी रास्ता इन कंपनियों के लिए प्रोजेक्ट साइकल को छोटा कर सकता है। हालांकि, कंपनियों को अब हाई-लेवल डेटा ट्रांसपेरेंसी और सुरक्षा के नए मानकों पर खरा उतरना होगा।
रिस्क और चुनौतियां
तेजी के साथ-साथ इसमें कुछ जोखिम भी हैं। 'L-plate' मॉडल का पूरा दारोमदार लगातार मॉनिटरिंग और ऑडिटिंग पर है। यदि कोई AI टूल क्लिनिकल ट्रायल के दौरान खराब प्रदर्शन करता है, तो उसे सस्पेंड किया जा सकता है, जिससे संबंधित कंपनियों के इन्वेस्टमेंट पर खतरा मंडरा सकता है।
ग्लोबल कॉम्पिटिशन
यह नया मॉडल EU के 'AI Act' के मुकाबले काफी लचीला है। UK खुद को एक 'इनोवेशन-फ्रेंडली हब' के तौर पर पेश कर रहा है ताकि ग्लोबल टेक टैलेंट और कैपिटल को आकर्षित किया जा सके। आने वाली तिमाहियों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह बदलाव हेल्थ-टेक प्रोवाइडर्स की कमर्शियल सक्सेस में कितनी बड़ी भूमिका निभाता है।
