बेंगलुरु की मेडटेक स्टार्टअप Tricog Health ने साल 2030 तक **10 करोड़** लोगों की कार्डियक स्क्रीनिंग का बड़ा लक्ष्य रखा है। कंपनी AI-पावर्ड टूल्स के जरिए ग्रामीण और शहरी इलाकों के बीच स्वास्थ्य सेवाओं की खाई को पाटने का काम कर रही है।
AI से बदल रही है डायग्नोस्टिक्स की तस्वीर
बेंगलुरु स्थित Tricog Health ने अगले 6 सालों में 10 करोड़ कार्डियक स्क्रीनिंग पूरी करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। 2014 में अपनी शुरुआत के बाद से ही कंपनी हार्ट हेल्थ के निदान को आधुनिक बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग कर रही है। कंपनी के पास VCardia और InstaECG जैसे प्लेटफॉर्म हैं, जो 140 से अधिक तरह की कार्डियक स्थितियों की तुरंत पहचान करने में सक्षम हैं। इसके बाद डेटा को क्लाउड प्लेटफॉर्म पर भेजा जाता है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम तेजी से रिपोर्ट वेरिफाई करती है। यह मॉडल इमरजेंसी केयर में लगने वाले कीमती समय को कम करने के लिए तैयार किया गया है।
बिजनेस मॉडल और ग्लोबल फुटप्रिंट
कंपनी 'हब-एंड-स्पोक' मॉडल पर काम करती है, जो छोटे शहरों के क्लीनिकों को बड़े टर्शियरी केयर सेंटरों से जोड़ता है। इसका फायदा यह है कि मरीज को बिना बड़े शहर ले जाए, दूरदराज के क्षेत्रों में भी विशेषज्ञ डॉक्टर की राय मिल जाती है। कंपनी ने अब तक 14 देशों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। फाइनेंशियल मोर्चे पर देखें तो कंपनी को Omron Healthcare और Sony Innovation Fund जैसे निवेशकों से लगभग $3 करोड़ की फंडिंग मिली है। फाइनेंशियल ईयर 2025 के लिए इसकी ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹50 करोड़ से ₹100 करोड़ के बीच आंकी गई है।
चुनौतियां और जोखिम
मेडटेक सेक्टर में विस्तार के साथ-साथ कई तरह के जोखिम भी हैं, जिन पर निवेशकों और जानकारों की नजर रहती है। सबसे बड़ी चुनौती जटिल रेगुलेटरी माहौल है, जहां हर देश के अलग मेडिकल स्टैंडर्ड्स और लाइसेंसिंग नियम होते हैं। इसके अलावा, मरीजों के सेंसिटिव डेटा को सुरक्षित रखना भी एक बड़ी जिम्मेदारी है। भारत जैसे कीमत के प्रति संवेदनशील (price-sensitive) बाजार में मुनाफा बनाए रखना भी आसान नहीं है। कंपनी को लगातार अपनी टेक्नोलॉजी की लागत और अफोर्डेबिलिटी के बीच संतुलन बनाना होगा, साथ ही बढ़ती प्रतिस्पर्धा का सामना भी करना होगा।
