रिसर्चर्स ने एक नया AI वॉइस-एनालिसिस टूल पेश किया है, जो मात्र **20** सेकेंड में टाइप-2 डायबिटीज की स्क्रीनिंग कर सकता है। हालांकि, तकनीक में **47%** का हाई फॉल्स-पॉजिटिव रेट एक बड़ी रुकावट बना हुआ है और कंपनी फिलहाल प्राइवेट है।
नई तकनीक का आधार
European Association for the Study of Diabetes (EASD) की वार्षिक बैठक में एक नई AI-आधारित डायग्नोस्टिक पद्धति पेश की गई। हेल्थटेक फर्म Thymia द्वारा विकसित यह टूल व्यक्ति की आवाज के नमूने को एनालाइज करता है। यह टूल आवाज के पिच, सांस लेने के पैटर्न और बोलने के तरीके में सूक्ष्म बदलावों को ट्रैक करके डायबिटीज के रिस्क मार्कर की पहचान करता है।
क्लिनिकल प्रदर्शन और चुनौतियां
रिसर्च के मुताबिक, AI मॉडल ने सेल्फ-रिपोर्टेड डेटा पर 0.80 और HbA1c ब्लड टेस्ट के मुकाबले 0.75 का AUC स्कोर दर्ज किया है। हालांकि, व्यावहारिक रूप से 47% का फॉल्स-पॉजिटिव रेट इसे एक भरोसेमंद स्क्रीनिंग टूल बनने से रोकता है। इसका सीधा मतलब है कि टूल द्वारा डायबिटीज बताए गए लगभग आधे लोग असल में स्वस्थ हो सकते हैं।
निवेशकों के लिए जरूरी जानकारी
जो निवेशक AI हेल्थकेयर सेक्टर पर नजर रखते हैं, उनके लिए यह जानना जरूरी है कि Thymia एक प्राइवेट कंपनी है और इसका कोई स्टॉक मार्केट में लिस्टेड नहीं है। फिलहाल यह रिसर्च प्री-प्रिंट सर्वर पर है और इसे अभी औपचारिक पियर-रिव्यू (peer review) से गुजरना बाकी है।
रिस्क और भविष्य की राह
यह तकनीक अभी शुरुआती डेवलपमेंट फेज में है। हाइपरटेंशन या कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों से जूझ रहे लोगों पर इस मॉडल की सटीकता काफी बदल जाती है। आने वाले समय में इसे कमर्शियल लेवल तक पहुँचाने के लिए डेटा को और अधिक विविध बनाने और फॉल्स-पॉजिटिव रेट को कम करने पर काम करने की जरूरत है। फिलहाल, यह एक प्रायोगिक प्रोजेक्ट से अधिक कुछ नहीं है।
