बेंगलुरु की डीपटेक स्टार्टअप Theranautilus ने Economic Times Startup Awards 2026 में 'Top Innovator' का पुरस्कार जीता है। कंपनी अपनी अनूठी मेडिकल नैनोरॉबोट टेक्नोलॉजी के लिए चर्चा में है और सितंबर 2026 में पहली बार ह्यूमन क्लिनिकल ट्रायल की तैयारी कर रही है।
भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) से निकली डीपटेक कंपनी Theranautilus ने चिकित्सा जगत में नई उम्मीदें जगाई हैं। इनकी मैग्नेटिकली कंट्रोल्ड नैनोरॉबोट्स टेक्नोलॉजी को 'swallowed surgeon' यानी निगला जा सकने वाला सर्जन कहा जा रहा है, जो शरीर के भीतर सूक्ष्म स्तर पर सटीक सर्जरी करने में सक्षम है।
मेडिकल माइक्रो-रोबोटिक्स का भविष्य
कंपनी की नैनोरॉबोट्स को बाहरी चुंबकीय बल (magnetic force) के जरिए नियंत्रित किया जाता है। फिलहाल इनका फोकस डेंटिस्ट्री पर है, जहां ये रूट कैनाल ट्रीटमेंट और दांतों की सेंसिटिविटी जैसी समस्याओं को दूर करने में काम आएंगे। प्रबंधन के अनुसार, सितंबर 2026 से इसके लिए ह्यूमन क्लिनिकल ट्रायल शुरू करने की योजना है।
बिजनेस मॉडल: मैन्युफैक्चरिंग नहीं, लाइसेंसिंग पर जोर
Theranautilus ने एक चतुर बिजनेस मॉडल अपनाया है। कंपनी खुद कोई बड़ी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने के बजाय अपनी टेक्नोलॉजी को फार्मा और मेडिकल-डिवाइस कंपनियों को लाइसेंस (License) देगी। इससे कंपनी का पूरा ध्यान रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) पर रहेगा।
निवेशकों के लिए चेतावनी
यह कंपनी अभी एक अनलिस्टेड प्राइवेट फर्म है और किसी शेयर बाजार में ट्रेड नहीं करती है। कंपनी अब तक ₹65 करोड़ की फंडिंग जुटा चुकी है, जिसमें pi Ventures, Pravega Ventures और Golden Sparrow जैसे नाम शामिल हैं। हालांकि, डीपटेक सेक्टर में क्लिनिकल ट्रायल का चरण काफी जोखिम भरा होता है। सफल ट्रायल और नियामक मंजूरी न मिलने पर कंपनी की विकास यात्रा प्रभावित हो सकती है, इसलिए निवेशकों को इसकी अनिश्चितताओं को ध्यान में रखना चाहिए।
