The ePlane Company, जो IIT मद्रास से जुड़ा एक स्टार्टअप है, ने Apollo Hospitals के साथ एक खास डील साइन की है। इस पार्टनरशिप के तहत, वे इलेक्ट्रिक एयर एम्बुलेंस और मेडिकल ड्रोन को तैनात करेंगे। इसका मकसद इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग (eVTOL) विमानों का इस्तेमाल करके आपातकालीन सेवाओं और अंगों के ट्रांसप्लांटेशन को तेज करना है। निवेशक कंपनी के रेगुलेटरी सर्टिफिकेशन के लिए 2027 की शुरुआत के लक्ष्य पर नज़र रख सकते हैं।
Detailed Coverage
मेडिकल लॉजिस्टिक्स में बड़ा कदम
The ePlane Company, जिसे इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) मद्रास में इनक्यूबेट किया गया है, उसने Apollo Hospitals के साथ मिलकर इलेक्ट्रिक एयर एम्बुलेंस सेवाएँ और मेडिकल ड्रोन लॉजिस्टिक्स शुरू करने के लिए एक रणनीतिक साझेदारी की है। इस सहयोग का उद्देश्य इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग (eVTOL) तकनीक का उपयोग करके महत्वपूर्ण चिकित्सा परिवहन की ज़रूरतों को पूरा करना है। कंपनी का दावा है कि यह पारंपरिक सड़क और हेलीकॉप्टर परिवहन का एक तेज़ और अधिक किफायती विकल्प प्रदान कर सकता है।
आपातकालीन सेवाओं का विस्तार
यह समझौता खास तौर पर e200x एयर एम्बुलेंस का उपयोग करके मरीजों, विशेष रूप से दिल या स्ट्रोक जैसी गंभीर स्थिति वाले मरीजों को तेज़ी से ले जाने पर केंद्रित है। मरीजों के परिवहन के अलावा, Apollo Hospitals की सहायक कंपनी, Amber Wings, अपने विशाल हेल्थकेयर नेटवर्क में टीके, दवाएं और ब्लड प्रोडक्ट्स पहुंचाने के लिए मानव रहित हवाई वाहनों (unmanned aerial vehicles) को तैनात करने की योजना बना रही है। The ePlane Company ने बताया कि यह नेटवर्क देश भर में लगभग 18,000 पिन कोड तक फैला हुआ है, जो इन तकनीकों के संभावित विस्तार के लिए एक महत्वपूर्ण पैमाना प्रदान करता है।
टेक्नोलॉजी और रेगुलेटरी माइलस्टोन
The ePlane Company पहले ही अपने e200X eVTOL विमान का पहला फुल-स्केल प्रोटोटाइप, जिसे PT-01 के नाम से जाना जाता है, पेश कर चुकी है, जो वर्तमान में ग्राउंड टेस्टिंग से गुजर रहा है। स्टार्टअप अब फ्लाइट टेस्टिंग के लिए डिज़ाइन किए गए दूसरे प्रोटोटाइप पर काम कर रहा है। निवेशकों के लिए एक प्रमुख मील का पत्थर कंपनी के फुल रेगुलेटरी सर्टिफिकेशन की योजना है, जिसे वह 2027 की शुरुआत तक हासिल करने का लक्ष्य बना रही है। टेस्टिंग से व्यावसायिक संचालन की ओर बढ़ने के लिए इस क्षेत्र में सफलता आवश्यक है।
मैन्युफैक्चरिंग और ऑपरेशनल क्षमता
यह स्टार्टअप वर्तमान में IIT मद्रास डिस्कवरी कैंपस से काम कर रहा है, लेकिन एक समर्पित मैन्युफैक्चरिंग सुविधा की योजना बना रहा है। कंपनी ने अपने संचालन के पहले वर्ष में 80 विमानों की उत्पादन क्षमता तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है। हालांकि यह समझौता सहयोग के लिए एक आधार स्थापित करता है, खरीदे जाने वाले विमानों की विशिष्ट संख्या और पूर्ण परिचालन ढांचे पर अभी भी चर्चा चल रही है। कंपनी ने यह भी संकेत दिया है कि वह कंपोनेंट्स की सोर्सिंग के लिए सप्लाई चेन पार्टनर्स के साथ काम कर रही है, और उन पार्टनर्स को प्राथमिकता दी जा रही है जो पहले से ही भारत में मैन्युफैक्चरिंग कर रहे हैं या करने की योजना बना रहे हैं।
भविष्य का दृष्टिकोण और निगरानी
हालांकि यह साझेदारी मेडिकल लॉजिस्टिक्स में एक नया आयाम लाती है, यह अभी भी विकास के चरण में है। कंपनी की दीर्घकालिक सफलता एविएशन रेगुलेशन को नेविगेट करने, अपनी मैन्युफैक्चरिंग योजनाओं को अंतिम रूप देने और अपने उत्पादन लक्ष्यों को पूरा करने की उसकी क्षमता पर निर्भर करेगी। गौरतलब है कि इस स्टार्टअप को पहले ICATT से 788 एयर एम्बुलेंस का एक बड़ा ऑर्डर मिला था, जिससे इसकी तकनीक और मैन्युफैक्चरिंग को सफलतापूर्वक स्केल करना उद्योग पर्यवेक्षकों के लिए एक प्राथमिक निगरानी बिंदु बन गया है। निवेशक और हितधारक संभवतः फ्लाइट टेस्टिंग शेड्यूल और Apollo Hospitals के साथ खरीद योजनाओं के अंतिम रूप पर आगे के अपडेट पर नज़र रखेंगे।
