तेलंगाना के आदिलाबाद स्थित Rajiv Gandhi Institute of Medical Sciences (RIMS) में शॉर्ट सर्किट के चलते भीषण आग लग गई, जिसमें **3** शिशुओं की मौत हो गई। प्रशासन ने **27** नवजातों को सुरक्षित बाहर निकाला है और पूरे राज्य में मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के सेफ्टी ऑडिट के आदेश दे दिए हैं।
सोमवार देर रात आदिलाबाद के सरकारी अस्पताल के स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट में लगी आग ने पूरे इलाके को दहला दिया। शुरुआती जांच में सामने आया है कि एसी (AC) में हुए शॉर्ट सर्किट के कारण प्लास्टिक के हिस्सों में आग लगी और धुंआ तेजी से पूरे वार्ड में फैल गया। आनन-फानन में अस्पताल प्रशासन और पुलिस ने 27 नवजातों को बचाकर आसपास के प्राइवेट अस्पतालों में शिफ्ट किया। मंगलवार तक मिली जानकारी के मुताबिक, 20 बच्चे निगरानी में हैं और 4 बच्चों को डिस्चार्ज किया जा चुका है।\n\n### सरकार ने दिए ऑडिट के आदेश\n\nस्वास्थ्य मंत्री सी. दामोदर राजनरसिम्हा ने अस्पताल का दौरा किया और घटना की उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं। सरकार ने राज्य भर के सभी मेडिकल केंद्रों में फायर और इलेक्ट्रिकल सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य कर दिया है। इस कदम का मकसद उन सुरक्षा खामियों को पहचानना है जिनके कारण यह हादसा हुआ। दोषियों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।\n\n### हेल्थकेयर सेक्टर और निवेश पर असर\n\nभारत के हेल्थकेयर सेक्टर के लिए अस्पतालों का इंफ्रास्ट्रक्चर हमेशा से एक अहम पैरामीटर रहा है। नेशनल बिल्डिंग कोड के मानकों को पूरा करने का दबाव पहले से ही बढ़ रहा है। ऐसी घटनाओं के बाद प्रशासन का रुख और सख्त हो जाता है, जिससे अस्पतालों के लिए लाइसेंस रिन्यूअल और कंप्लायंस ऑडिट और भी कठिन हो सकते हैं।\n\nनिवेशकों और एनालिस्ट्स के नजरिए से देखें, तो इसका सीधा असर ऑपरेशनल कॉस्ट पर पड़ेगा। पुरानी इमारतों वाले अस्पतालों को अब फायर सेफ्टी सिस्टम और इलेक्ट्रिकल रेट्रोफिटिंग पर बड़ा निवेश करना होगा। NABH जैसी संस्थाओं के एक्रेडिटेशन मानकों में भी सुरक्षा प्रोटोकॉल को और प्राथमिकता दी जा रही है। अगर राज्य सरकार नए और महंगे सुरक्षा दिशा-निर्देश लागू करती है, तो आगामी तिमाहियों में अस्पतालों के कैपिटल एक्सपेंडिचर (CAPEX) में बढ़ोत्तरी देखने को मिल सकती है।
