Tata 1mg ने अपनी 30-मिनट वाली दवा डिलीवरी सर्विस को 10 बड़े शहरों में विस्तार देने का फैसला किया है। कंपनी साल के अंत तक अपने रिटेल स्टोर्स की संख्या को **350** से बढ़ाकर **500** करने की तैयारी में है, ताकि इंस्टेंट डिलीवरी का फायदा उठाया जा सके।
तेजी की रणनीति
Tata 1mg ई-फार्मेसी मॉडल को पूरी तरह से बदल रही है। कंपनी अब पारंपरिक 'सेम-डे डिलीवरी' से आगे बढ़कर 'क्विक-कॉमर्स' की दौड़ में शामिल हो गई है। इसका मुख्य फोकस बुखार या दर्द जैसी गंभीर और तुरंत जरूरत वाली दवाओं पर है। कंपनी का लक्ष्य अपने मौजूदा 350 रिटेल आउटलेट्स को साल के अंत तक 500 तक ले जाना है।
चुनौतियां और रेगुलेटरी पेंच
ग्रॉसरी डिलीवरी के मुकाबले फार्मा सेक्टर कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण है। हर ऑर्डर के लिए लाइसेंस्ड फार्मासिस्ट से वेरिफिकेशन अनिवार्य है। साथ ही, कुछ दवाओं के लिए कोल्ड-चेन मेंटेन करना एक महंगा काम है। इन जटिलताओं के बावजूद, Tata 1mg अपनी डिजिटल मौजूदगी को फिजिकल नेटवर्क के साथ जोड़कर सप्लाई चेन को दुरुस्त करने की कोशिश कर रही है, जिसमें भारी कैपिटल इन्वेस्टमेंट की जरूरत है।
इन्वेंट्री और कॉम्पिटिशन का गणित
30 मिनट की डिलीवरी संभव बनाने के लिए कंपनी हाइपर-लोकल लेवल पर डेटा-आधारित इन्वेंट्री मैनेजमेंट का इस्तेमाल कर रही है। ताकि सही दवाएं ग्राहकों के पास मौजूद रहें। हालांकि, मार्केट में अब क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की एंट्री से मुकाबला कड़ा हो गया है। इन्वेस्टर्स की नजर इस बात पर होनी चाहिए कि इतनी महंगी लॉजिस्टिक्स के बीच कंपनी अपने मार्जिन को कैसे बनाए रखती है और रेगुलेटरी नियमों का पालन करते हुए स्केल कैसे करती है।
