फार्मा में TII का बड़ा दांव: 3xper को मिलेंगे ₹100 करोड़
Tube Investments of India (TII) अपने फार्मा सेक्टर में दखल को और मजबूत कर रहा है। कंपनी ने अपनी सबसिडियरी 3xper Innoventure Ltd (3xper) में 100 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश करने का फैसला किया है। इस पूंजी आवंटन में 75 करोड़ रुपये TII खुद लगाएगी, जबकि 25 करोड़ रुपये 3xper के CEO N Govindarajan लगाएंगे। यह पैसा कंपल्सरी कनवर्टिबल प्रेफरेंस शेयर्स (CCPS) के जरिए 3xper की कॉन्ट्रैक्ट डेवलपमेंट और मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेशंस (CDMO) क्षमताओं को बढ़ाने और विस्तार देने के लिए इस्तेमाल होगा।
ऑपरेशनल ग्रोथ को मिलेगी रफ़्तार
23 अप्रैल, 2026 को घोषित यह 100 करोड़ रुपये का निवेश सीधे तौर पर 3xper की ऑपरेशनल क्षमताओं को बढ़ाने और उन्हें और बेहतर बनाने के लिए है। इससे 3xper और उसकी सब्सिडियरीज की ग्रोथ की रफ़्तार तेज होने की उम्मीद है। यह निवेश TII के मार्च 2023 में CDMO और API बिजनेस में 285 करोड़ रुपये के शुरुआती निवेश की योजना के बाद आया है, जो इस नए वर्टिकल को स्थापित करने के लिए था। इस खबर के बाद, 23 अप्रैल, 2026 को TII के स्टॉक में लगभग 4.82% की तेजी आई और यह 3,024.40 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहा था।
CDMO सेक्टर की अपार संभावनाएं
भारतीय CDMO मार्केट में जबरदस्त ग्रोथ की उम्मीद है। अनुमान है कि यह 2030 तक 20 बिलियन डॉलर का आंकड़ा पार कर सकता है। वहीं, कुछ अन्य रिपोर्टें 2034 और 2033 तक इस मार्केट का साइज 16.53 बिलियन डॉलर से 55.5 बिलियन डॉलर के बीच रहने का अनुमान लगाती हैं, जिसमें 7.39% से 13.2% तक की सालाना ग्रोथ (CAGR) देखी जा सकती है। इस ग्रोथ के पीछे ग्लोबल आउटसोर्सिंग में बढ़ोतरी, जटिल थेरेपी और बायोलॉजिक्स की तरफ बढ़ता रुझान, और भारत के सस्ते स्किल्ड लेबर जैसे फैक्टर्स हैं।
कड़ी प्रतिस्पर्धा और जोखिम
यह सेक्टर Lonza, WuXi AppTec जैसे ग्लोबल दिग्गजों के साथ-साथ Piramal Pharma Solutions, Divi's Laboratories, Laurus Labs जैसे भारतीय कंपनियों के दबदबे वाला है। 3xper के सीधे मुकाबले में Pharmaron और Boehringer Ingelheim जैसी कंपनियां हैं। TII के शेयर फिलहाल 41.14 से 93.41 के बीच के हाई प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो पर ट्रेड कर रहे हैं, जो भविष्य में तगड़ी कमाई की उम्मीद जगाते हैं। हालांकि, 3xper अभी एक नई कंपनी है जिसकी FY25 में रेवेन्यू सिर्फ 6.46 करोड़ रुपये थी। फार्मा इंडस्ट्री के सख्त रेगुलेटरी नियम भी इस वेंचर के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर सकते हैं।
आगे क्या?
CEO N Govindarajan के पास Pharma इंडस्ट्री का लंबा अनुभव है, लेकिन एक कॉम्पिटिटिव CDMO बिजनेस को ज़ीरो से खड़ा करना एक बड़ा टास्क है। विश्लेषकों ने 3,571.50 रुपये के करीब टारगेट प्राइस दिए हैं, लेकिन निकट अवधि में मार्जिन पर चिंताएं बनी हुई हैं। मुरुगप्पा ग्रुप का यह कदम पोर्टफोलियो को डाइवर्सिफाई करने की मंशा दिखाता है, लेकिन फार्मा CDMO सेक्टर में एक मजबूत प्लेयर बनने का सफर कैपिटल-इंटेंसिव और पेचीदा रहने वाला है।
