Supriya Lifescience Share: कस्टम विभाग की जांच से **12%** टूटा शेयर, जानिए वजह

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AuthorMehul Desai|Published at:
Supriya Lifescience Share: कस्टम विभाग की जांच से **12%** टूटा शेयर, जानिए वजह

Supriya Lifescience के शेयरों में आज **12%** की बड़ी गिरावट देखने को मिली। कंपनी के एक सीनियर एग्जीक्यूटिव को जुडिशियल कस्टडी में भेजा गया है, जिसके बाद कस्टम डिपार्टमेंट ने एक एक्सपोर्ट ट्रांजेक्शन में प्रोसीजरल लैप्स को लेकर कार्रवाई शुरू की है। कंपनी का कहना है कि इस घटना का उसके ऑपरेशन्स और फाइनेंशियल्स पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा।

कस्टम की जांच से शेयर में भारी गिरावट

आज शेयर बाज़ार में Supriya Lifescience के शेयरों में भारी गिरावट आई। इंट्रा-डे ट्रेडिंग के दौरान स्टॉक 12% तक नीचे गिर गया और बीएसई (BSE) पर ₹863.50 पर पहुंच गया। यह गिरावट कंपनी की उस घोषणा के बाद आई है जिसमें उसने सेल्स एंड मार्केटिंग के जनरल मैनेजर, श्रीकांत श्रीधरन, के खिलाफ जुडिशियल प्रोसीडिंग्स की जानकारी दी थी।

कस्टम डिपार्टमेंट की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन एंड इंटेलिजेंस ब्रांच ने 3 जुलाई, 2026 को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट के तहत यह एक्शन लिया। कंपनी के अनुसार, यह मामला एक सिंगल एक्सपोर्ट ट्रांजेक्शन में प्रोसीजरल लैप्स से जुड़ा है। चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट ने एग्जीक्यूटिव को 17 जुलाई, 2026 तक के लिए जुडिशियल कस्टडी में भेज दिया है।

कंपनी का क्या है कहना?

कंपनी के मैनेजमेंट ने शेयरहोल्डर्स को भरोसा दिलाया है कि इस मामले का उसके ऑपरेशन्स, फाइनेंसियल हेल्थ या गवर्नेंस पर कोई बड़ा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। Supriya Lifescience फिलहाल कानूनी सलाह ले रही है और आगे के किसी भी डेवलपमेंट से शेयरधारकों को अवगत कराती रहेगी।

यह स्टॉक में गिरावट ऐसे समय में आई है जब हाल ही में, 2 जून, 2026 को कंपनी के शेयर 14% गिरे थे। पिछले 52 हफ्तों की बात करें तो, यह स्टॉक 24 मार्च, 2026 को ₹545.65 के स्तर पर था, जबकि 1 जून, 2026 को यह ₹1,085.50 के उच्चतम स्तर पर पहुंचा था।

बिजनेस आउटलुक

इस कानूनी खबर के बावजूद, Choice Institutional Equities के एनालिस्ट्स का कंपनी के बिजनेस फंडामेंटल्स पर पॉजिटिव नज़रिया बना हुआ है। उनका अनुमान है कि पिछले साल के लो बेस के कारण जून 2026 तिमाही में रेवेन्यू में अच्छी ग्रोथ देखने को मिल सकती है। हालांकि, यह भी ध्यान देने वाली बात है कि कंपनी नए फैसिलिटीज के स्केल-अप पर खर्चा कर रही है, जिससे आने वाले समय में प्रॉफिट मार्जिन में अस्थायी कमी आ सकती है।

आगे चलकर, कंपनी की फाइनेंसियल परफॉरमेंस कुछ खास बिजनेस एरियाज में उसकी प्रगति पर निर्भर करेगी। इसमें गुड लैबोरेटरी प्रैक्टिस सर्टिफिकेशन, कॉन्ट्रैक्ट डेवलपमेंट एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑर्गनाइजेशन (CDMO) कॉन्ट्रैक्ट्स की स्थिति और नए एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट (API) मॉलिक्यूल्स का सफल लॉन्च शामिल है। मार्जिन इम्प्रूवमेंट के लॉन्ग-टर्म अनुमान कंपनी द्वारा खास थेरेपीज और इंटरनल प्रोडक्शन कैपेबिलिटीज पर फोकस करने से जुड़े हैं, लेकिन इसके साथ-साथ रेगुलेटरी कंप्लायंस का भी ध्यान रखना होगा।

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