कोर्ट का बड़ा फैसला, क्या है पूरा मामला?
Sun Pharmaceutical Industries ने लंबे समय से चले आ रहे ट्रेडमार्क उल्लंघन के मामले में एक बड़ी जीत हासिल की है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक नवी मुंबई स्थित दवा निर्माता कंपनी को 'Absun' और 'Absun Pharma' जैसे ब्रांड नामों का उपयोग करने से रोक दिया है। कोर्ट का मानना है कि ये नाम Sun Pharma के रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क, जैसे 'Sun' और 'Sun Pharma', से काफी मिलते-जुलते हैं।
जस्टिस मनीष पितले ने अपने फैसले में साफ कहा कि Sun Pharma के ट्रेडमार्क के आगे सिर्फ 'AB' अक्षर जोड़ देने से कोई नया या अलग ब्रांड नहीं बन जाता। कोर्ट ने पाया कि 'Absun' और 'Absun Pharma' नाम, Sun Pharma के ट्रेडमार्क से दिखने, संरचना और उच्चारण (phonetically) तीनों ही तरह से भ्रामक रूप से समान (deceptively similar) हैं। इस फैसले से यह भी साफ हो गया कि विरोधी कंपनियों के ट्रेड नाम वास्तव में Sun Pharma के मालिकाना हक वाले नामों को अपने में समेट लेते हैं।
यह कानूनी लड़ाई दिलीप सांघवी (Dilip Sanghvi) की अगुवाई वाली Sun Pharmaceutical Industries ने 2013 में शुरू की थी। कंपनी का तर्क था कि विरोधी ब्रांड नाम, खासतौर पर दवाइयों और फार्मास्युटिकल उत्पादों के लिए, उनके अपने रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क के बहुत करीब हैं। Sun Pharma ने सबूत पेश किए कि 'Sun' ट्रेडमार्क का रजिस्ट्रेशन 1983 से है, जबकि इसके उपयोग के दावे 1978 से आ रहे थे। कंपनी के वकील (counsel) ने दलील दी कि फार्मा सेक्टर में ग्राहकों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा होने से रोकने के लिए एक सख्त रवैया अपनाना जरूरी है।
यह कानूनी जीत Sun Pharma की अपने इंटेलैक्चुअल प्रॉपर्टी (intellectual property) और ब्रांड पहचान को प्रतिस्पर्धी फार्मा मार्केट में सुरक्षित रखने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
