सन फार्मास्युटिकल (Sun Pharmaceutical) ने पहली तिमाही (Q1 FY27) के लिए अपने शानदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का रेवेन्यू **10%** बढ़ा है, जिसका मुख्य श्रेय भारत में जोरदार बिक्री और इनोवेटिव दवाओं को जाता है। हालांकि, अमेरिकी जेनेरिक बिजनेस में प्राइस इरोजन (price erosion) और बढ़ती प्रतिस्पर्धा कंपनी के लिए चुनौती बनी हुई है।
भारत में सेल्स और नई दवाओं का कमाल
सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने जून 2026 को समाप्त तिमाही के लिए ₹15,183 करोड़ का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू दर्ज किया है, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 10% अधिक है। यह प्रदर्शन कंपनी के पूरे फाइनेंशियल ईयर के लिए सिंगल-डिजिट ग्रोथ के अनुमान से कहीं बेहतर रहा।
कंपनी के रेवेन्यू में 36% का योगदान भारत के फॉर्मूलेशन बिजनेस का रहा, जिसकी बिक्री 16% बढ़कर ₹5,475 करोड़ हो गई। कंपनी ने इसका श्रेय कार्डियोवैस्कुलर, सेंट्रल नर्वस सिस्टम और गैस्ट्रो-ऑर्थो थेरेपी क्षेत्रों में मजबूत मांग को दिया। इस ग्रोथ में वॉल्यूम ग्रोथ का हिस्सा करीब 40% रहा, जबकि नए प्रोडक्ट्स की लॉन्चिंग से 20% का योगदान मिला। खास बात यह है कि सन फार्मा ने सेमाग्लूटाइड (semaglutide) मार्केट में अपनी जगह बनाई है और यह सेमाग्लूटाइड ऑटो-इंजेक्शन (auto-injector) बनाने वाली एकमात्र भारतीय कंपनी बन गई है।
इनोवेटिव दवाओं ने भी कंपनी के रेवेन्यू को बढ़ाया है। इन दवाओं से ग्लोबल रेवेन्यू 12.8% बढ़कर $351 मिलियन हो गया, जिसमें Ilumya, Odomzo और Cequa जैसे प्रोडक्ट्स का बड़ा योगदान रहा। उभरते बाजारों (emerging markets) में रुपए के हिसाब से 15.4% की ग्रोथ देखी गई, हालांकि डॉलर के मुकाबले यह ग्रोथ 4% पर धीमी रही, जो कुछ क्षेत्रों में आर्थिक और भू-राजनीतिक चुनौतियों को दर्शाती है।
अमेरिका में जेनेरिक बिजनेस की मुश्किलें
घरेलू बाजार के विपरीत, अमेरिका के फॉर्मूलेशन बिजनेस में 9.7% की गिरावट दर्ज की गई और रेवेन्यू घटकर $427 मिलियन रह गया। इस गिरावट की मुख्य वजह लगातार प्राइस इरोजन (price erosion) और कड़े बाजार प्रतिस्पर्धा को बताया जा रहा है, खासकर Lenalidomide के मामले में। कंपनी अब अपनी नई दवा Leqselvi से उम्मीदें लगा रही है, जिसे डॉक्टर्स का एक्सेप्टेंस मिल रहा है और इसकी प्रिस्क्रिप्शन रेट बढ़ रही है।
मार्जिन पर दबाव और भविष्य की रणनीति
कंसोलिडेटेड EBITDA मार्जिन में 133 बेसिस पॉइंट की गिरावट आई है और यह 28.1% पर आ गया है। यह दबाव एक्वीजीशन से जुड़े बढ़े हुए खर्चे, फॉरेन एक्सचेंज गेन (foreign exchange gain) में कमी और नए प्रोडक्ट्स की लॉन्चिंग पर हुए अधिक खर्च के कारण है। हालांकि, ग्रॉस मार्जिन 95 बेसिस पॉइंट सुधरकर 80.5% हो गया, जिसका कारण अधिक मुनाफे वाले प्रोडक्ट्स के मिक्स की ओर बढ़ना है।
कंपनी साल 2027 के चौथी तिमाही तक Organon एक्वीजीशन (acquisition) को पूरा करने की दिशा में काम कर रही है। हालांकि इस पोर्टफोलियो से तुरंत बड़े फाइनेंशियल लाभ की उम्मीद कम है, लेकिन JM Financial के एनालिस्ट्स का मानना है कि यह डील FY29 तक कंपनी के एनुअल फ्री कैश फ्लो (annual free cash flow) को दोगुना कर सकती है। आगे चलकर, निवेशकों को इस एक्वीजीशन से जुड़े इंटीग्रेशन कॉस्ट (integration costs), R&D खर्चों के मैनेजमेंट और अमेरिकी जेनेरिक दवा बाजार में कीमतों की स्थिरता पर नजर रखनी चाहिए।
