नींद की कमी से बढ़ता है वज़न! कोलंबिया यूनिवर्सिटी का चौंकाने वाला खुलासा

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
नींद की कमी से बढ़ता है वज़न! कोलंबिया यूनिवर्सिटी का चौंकाने वाला खुलासा

कोलंबिया यूनिवर्सिटी के एक नए शोध में पता चला है कि रोज़ाना सिर्फ 80 मिनट की नींद कम करने से लोगों का वज़न बढ़ सकता है और उनकी शारीरिक सक्रियता घट सकती है। यह स्टडी बताती है कि मेटाबोलिक हेल्थ को दुरुस्त रखने के लिए पर्याप्त नींद लेना कितना ज़रूरी है।

कम नींद और वज़न का सीधा संबंध

कोलंबिया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक हालिया क्लिनिकल स्टडी में नींद की कमी और सेहत पर पड़ने वाले असर के बीच सीधा संबंध बताया है। इस रिसर्च में 95 ऐसे एडल्ट्स को शामिल किया गया था जो आमतौर पर रात में 7 से 8 घंटे सोते थे। 6 हफ्तों तक, इन लोगों की नींद औसतन 80 मिनट कम कर दी गई। नतीजों में चौंकाने वाली बात सामने आई: इन लोगों का वज़न औसतन 453 ग्राम बढ़ गया।

शारीरिक सक्रियता पर असर

वज़न बढ़ने के साथ-साथ, स्टडी में यह भी देखा गया कि लोगों की रोज़ाना की एक्टिविटी में भी कमी आई। रिस्ट-बैंड ट्रैकिंग डिवाइसेज की मदद से पता चला कि पार्टिसिपेंट्स दिन में औसतन 17 मिनट ज़्यादा इनएक्टिव रहने लगे। सबसे ज़्यादा असर पुरुषों और पोस्ट-मेनोपॉजल महिलाओं पर दिखा, जिनकी सेडेंटरी (निष्क्रिय) टाइमिंग रोज़ाना करीब 30 मिनट बढ़ गई। यह साफ इशारा है कि नींद की कमी से लोगों के लिए अपनी रोज़मर्रा की फिजिकल एक्टिविटी बनाए रखना मुश्किल हो जाता है।

नींद और मेटाबोलिज्म पर डॉक्टर्स की राय

'एनाल्स ऑफ इंटरनल मेडिसिन' में पब्लिश हुई इस स्टडी के मुताबिक, नींद सिर्फ आराम का समय नहीं है, बल्कि यह मेटाबोलिक रेगुलेशन का एक अहम हिस्सा है। लीड रिसर्चर मैरी-पियरे सेंट-ओंज (Marie-Pierre St-Onge) और फारिस ज़ुराईकत (Faris Zuraikat) ने बताया कि भले ही 6 हफ्तों में वज़न बढ़ना मामूली लगे, लेकिन लंबे समय में ऐसे लाइफस्टाइल बदलाव दिल की बीमारियों और टाइप 2 डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा काफी बढ़ा सकते हैं।

स्टडी की सीमाएं और आगे का शोध

हालांकि, यह स्टडी हल्के और लगातार होने वाले नींद के नुकसान के शरीर पर पड़ने वाले असर के बारे में अहम जानकारी देती है, लेकिन जानकारों का मानना है कि इन नतीजों को सावधानी से देखा जाना चाहिए। ऐसा इसलिए, क्योंकि स्टडी में शामिल लोग पहले से ही कार्डियोमेटाबोलिक समस्याओं के ज़्यादा रिस्क पर थे। ऐसे में, ये नतीजे शायद हर किसी पर बिल्कुल वैसे ही लागू न हों। साथ ही, यह स्टडी सिर्फ 6 हफ्तों तक चली, इसलिए क्रॉनिक नींद की कमी के लंबे समय के मेटाबोलिक असर पर अभी और रिसर्च की ज़रूरत है। यह रिसर्च एक बार फिर साफ करती है कि अच्छी सेहत के लिए वज़न कंट्रोल और एक्सरसाइज के साथ-साथ 'स्लीप हाइजीन' यानी अच्छी नींद लेना भी उतना ही ज़रूरी है।

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