Serum Institute of India (SII) ने TB की रोकथाम के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कंपनी ने Gates Medical Research Institute के साथ मिलकर M72/AS01E नाम की नई ट्यूबरकुलोसिस वैक्सीन बनाने का करार किया है। इस प्रोजेक्ट के लिए SII **$100 मिलियन** (लगभग **₹830 करोड़**) से ज़्यादा का निवेश करेगी, ताकि क्लिनिकल ट्रायल और अप्रूवल के बाद इसे दुनिया भर में पहुँचाया जा सके।
ग्लोबल हेल्थ में Serum Institute का बड़ा कदम
Serum Institute of India (SII) ने ट्यूबरकुलोसिस (TB) जैसी गंभीर बीमारी से लड़ने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने Gates Medical Research Institute के साथ एक अहम मैन्युफैक्चरिंग पार्टनरशिप की है, जिसके तहत M72/AS01E वैक्सीन का उत्पादन किया जाएगा। TB दुनिया भर में, खासकर कम और मध्यम आय वाले देशों में, मौतों का एक बड़ा कारण बनी हुई है। इस नए प्रोजेक्ट के ज़रिए, SII अपने प्रोडक्शन कैपेसिटी को बढ़ाने के लिए $100 मिलियन (यानी ₹830 करोड़ से अधिक) का कैपिटल इन्वेस्टमेंट करने की तैयारी में है।
बड़ी तादाद में प्रोडक्शन की तैयारी
आम तौर पर, वैक्सीन बनाने वाली कंपनियां अप्रूवल मिलने के बाद ही प्रोडक्शन शुरू करती हैं। लेकिन इस कोलेबोरेशन में, SII टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर पहले से ही फोकस कर रही है। कंपनी अपने मैन्युफैक्चरिंग लाइन्स को Phase 3 क्लिनिकल ट्रायल के नतीजों के मद्देनज़र तैयार कर रही है। SII वैक्सीन का एंटीजन बनाएगी, जबकि GSK, AS01E एडजुवेंट की सप्लाई करेगी। इस स्ट्रेटेजी का मकसद यह है कि अगर वैक्सीन को रेगुलेटरी अप्रूवल मिल जाता है, तो इसे हाई-बर्डन देशों में जल्द से जल्द पहुँचाया जा सके।
SII अभी से कैपेसिटी बिल्ड करके यह सुनिश्चित करना चाहती है कि अप्रूवल मिलते ही वैक्सीन की सप्लाई शुरू हो जाए। इस प्लान में इंडोनेशिया और साउथ अफ्रीका जैसे देशों के लोकल मैन्युफैक्चरर्स के साथ काम करने की भी बात शामिल है, जिससे सप्लाई चेन को और मज़बूत किया जा सके और वैक्सीन तक सबकी पहुँच आसान हो।
क्लिनिकल स्थिति और बाकी खिलाड़ी
फिलहाल M72/AS01E वैक्सीन Phase 3 क्लिनिकल ट्रायल के दौर से गुज़र रही है। इसके लिए साउथ अफ्रीका, केन्या और इंडोनेशिया जैसे देशों में 2025 की शुरुआत तक पार्टिसिपेंट्स का एनरोलमेंट पूरा हो चुका है। Phase 2b स्टडी के पिछले नतीजों के मुताबिक, यह वैक्सीन कुछ एडल्ट पॉप्युलेशन में पल्मोनरी टीबी को बढ़ने से रोकने में लगभग 50% तक सुरक्षा दे सकती है। अगर यह सफल होती है, तो TB का ग्लोबल बोझ काफी कम हो सकता है और इससे जुड़े आर्थिक नुकसान भी घट सकते हैं।
भारत में TB की रोकथाम के लिए काम करने वाली कंपनियों का इकोसिस्टम तेज़ी से बढ़ रहा है। SII के अलावा, Bharat Biotech भी MTBVAC नाम की एक वैक्सीन के Phase 3 ट्रायल कर रही है, जिसे University of Zaragoza और Biofab ने डेवलप किया है। वहीं, Cadila Pharmaceuticals ने भी Indian Council of Medical Research (ICMR) के साथ मिलकर Immuvac पर काम किया है। ये सब मिलकर ग्लोबल बायोटेक्नोलॉजी और वैक्सीन सेक्टर में भारतीय कंपनियों की अहमियत को दर्शाते हैं।
निवेशकों और मार्केट पर नज़र रखने वालों के लिए, अगले कुछ महत्वपूर्ण अपडेट्स Phase 3 क्लिनिकल ट्रायल के नतीजे, भारत और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में रेगुलेटरी फाइलिंग्स, और कंपनी के कमर्शियल प्रोडक्शन की शुरुआत का टाइमलाइन होंगे। इस वैक्सीन की सफलता क्लिनिकल एफिकेसी, रेगुलेटरी अप्रूवल की स्पीड और SII की कैपिटल स्पेंडिंग को मैनेज करने की क्षमता पर निर्भर करेगी, साथ ही कंपनी को अपने मौजूदा प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को भी बनाए रखना होगा।
