अगले साल, यानी मार्च 2026 में, Semaglutide का पेटेंट खत्म हो रहा है। यह वो एक्टिव इंग्रीडिएंट है जो Novo Nordisk की Ozempic और Wegovy जैसी ब्लॉकबस्टर दवाओं में इस्तेमाल होता है। पेटेंट खत्म होते ही भारत की कई बड़ी फार्मा कंपनियां इसकी जेनेरिक (Generic) दवाएं मार्केट में उतारने के लिए तैयार हैं, और इससे कीमतों की एक जोरदार जंग (Price War) छिड़ने की पूरी उम्मीद है।
जेनेरिक दवाओं का हमला
इस 'जेनेरिक हमले' की शुरुआत मार्च 2026 के अंत से ही हो जाएगी। Sun Pharma, Dr. Reddy's Laboratories, Zydus Lifesciences, और Natco Pharma जैसी दिग्गज कंपनियां अपनी दवाएं लॉन्च करने के लिए रेगुलेटरी अप्रूवल (Regulatory Approval) ले चुकी हैं। Sun Pharma अपने ब्रांड Noveltreat के साथ पहले दिन से मार्केट में उतरने की तैयारी में है। वहीं, Dr. Reddy's ने टाइप 2 डायबिटीज के लिए जेनेरिक Ozempic का अप्रूवल पा लिया है और पहले साल में 1.2 करोड़ पेन बेचने का लक्ष्य रखा है। Zydus Lifesciences एक खास इंजेक्टेबल वर्जन पर काम कर रही है। Eris Lifesciences और Natco Pharma के बीच का कोलैबोरेशन भी इस बढ़ते मार्केट में स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप की ओर इशारा करता है।
कीमतों में गिरावट और मार्केट का विस्तार
एक्सपर्ट्स का मानना है कि जेनेरिक Semaglutide की कीमतें शुरुआत में ही ओरिजिनल ब्रांड्स से 30-50% तक कम होंगी। समय के साथ, यह कमी 70-75% तक भी जा सकती है। इस प्राइस ड्रॉप से इन दवाओं तक पहुंच बढ़ेगी, और जो इलाज अब तक सिर्फ अमीर लोगों के लिए था, वह आम आदमी के लिए भी किफायती हो जाएगा। भारत में फिलहाल ₹1,400 करोड़ के वेट-लॉस मार्केट का साइज अगले एक साल में दोगुना होने का अनुमान है। आने वाले कुछ सालों में यह मार्केट दस गुना तक बढ़ सकता है। अकेले GLP-1 सेगमेंट में पहले ही भारत में सालाना ₹1,000 करोड़ से ज्यादा की बिक्री हो रही है।
कंपनियों का फाइनेंशियल प्रोफाइल
बाजार में उतरने वाली भारतीय कंपनियों की अपनी-अपनी खासियतें हैं। Sun Pharma जैसी लीडिंग कंपनी का ROCE 18.97% और ROE 15.66% है, लेकिन इसका P/E रेशियो 33.9 से 103.36 के बीच है और पिछले 3 साल में रेवेन्यू ग्रोथ कुछ खास नहीं रही। Dr. Reddy's का P/E रेशियो लगभग 18.36 है, जो इंडस्ट्री के मुकाबले ठीक-ठाक है। Zydus Lifesciences का P/E लगभग 19.55 है और इसका ROE 31.29% है, जो अच्छी ग्रोथ दिखाता है। Natco Pharma का P/E रेशियो सबसे कम 10.36 है, जो इसे अंडरवैल्यूड (Undervalued) बता रहा है, और यह लगभग डेट-फ्री (Debt-free) कंपनी है। Cipla का P/E 23.57 के आसपास है, जबकि Eris Lifesciences का P/E 40 से 60 के पार है, और पिछले 3 साल में प्रॉफिट ग्रोथ कमजोर रही है।
पिछला अनुभव
पिछली बार जब भी किसी बड़ी दवा का पेटेंट खत्म हुआ है, तब हमने देखा है कि जेनेरिक वर्जन आने के बाद कीमतें काफी गिरी हैं और मरीजों तक दवा की पहुंच कई गुना बढ़ी है। Semaglutide के साथ भी ऐसे ही पैटर्न की उम्मीद है, जैसा कि कई दूसरी जरूरी दवाओं के केस में देखा गया है।
चुनौतियां और भविष्य का रास्ता
हालांकि, इस प्राइस वॉर से कीमतों में भारी गिरावट आएगी, जो मरीजों के लिए अच्छी बात है, लेकिन कंपनियों की प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) पर इसका असर पड़ सकता है। Sun Pharma जैसी बड़ी कंपनी को भी ऊंचे P/E रेशियो और धीमी रेवेन्यू ग्रोथ की वजह से चुनौती मिल सकती है। Eris Lifesciences जैसी कंपनियों का वैल्यूएशन काफी ज्यादा लग रहा है, और इनटेंस कंपटीशन (Intense Competition) से मार्जिन पर दबाव आ सकता है, खासकर उन कंपनियों के लिए जो कॉस्ट एफिशिएंट (Cost Efficient) नहीं हैं। इसके अलावा, अमेरिका जैसे बाजारों में रेगुलेटरी प्रेशर और प्राइसिंग प्रेशर भी कंपनियों के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है।
इंडस्ट्री एनालिस्ट्स का मानना है कि भारतीय फार्मा मार्केट में ग्रोथ जारी रहेगी, और वेट-लॉस सेगमेंट इसमें अहम भूमिका निभाएगा। Semaglutide जेनेरिक दवाओं के आने से मार्केट साइज में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी। जो कंपनियां प्रोडक्शन कॉस्ट को कंट्रोल कर पाएंगी, सप्लाई चेन को मजबूत रखेंगी और अपने प्रोडक्ट्स को सही से पोजिशन करेंगी, उन्हें इसका सबसे ज्यादा फायदा होगा। ब्रोकरेज रिपोर्ट्स भी सेक्टर के लिए पॉजिटिव आउटलुक (Positive Outlook) दिखा रही हैं, और लगातार दवाओं की डिमांड व नए प्रोडक्ट्स की लॉन्चिंग से ग्रोथ बनी रहने की उम्मीद है।
