Sekhmet Pharmaventures का बड़ा प्लान: 3 साल में ₹2,000 करोड़ रेवेन्यू का लक्ष्य, CDMO मॉडल पर फोकस

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Sekhmet Pharmaventures का बड़ा प्लान: 3 साल में ₹2,000 करोड़ रेवेन्यू का लक्ष्य, CDMO मॉडल पर फोकस

Sekhmet Pharmaventures, जो कि प्राइवेट इक्विटी फर्मों द्वारा समर्थित है, अगले तीन सालों में ₹2,000 करोड़ के रेवेन्यू तक पहुंचने का लक्ष्य लेकर चल रही है। कंपनी कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग (Contract Manufacturing) की ओर बढ़ रही है और अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए ₹150 करोड़ का निवेश करेगी।

Sekhmet Pharmaventures का बड़ा दांव

प्राइवेट इक्विटी फर्म PAG, CX पार्टनर्स और समारा कैपिटल जैसी बड़ी कंपनियों के सपोर्ट वाली Sekhmet Pharmaventures ने अगले तीन सालों में ₹2,000 करोड़ का रेवेन्यू हासिल करने का रोडमैप तैयार किया है। फिलहाल, कंपनी का रेवेन्यू ₹1,500 करोड़ से ज़्यादा है। यह स्ट्रेटेजी कंपनी के पुराने वॉल्यूम-आधारित एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट (API) बिजनेस से हटकर, एक इंटीग्रेटेड कॉन्ट्रैक्ट डेवलपमेंट एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑर्गनाइजेशन (CDMO) मॉडल की ओर एक बड़ा कदम है।

ग्लोबल क्लाइंट्स के लिए क्षमता विस्तार

इस बदलाव को सपोर्ट करने के लिए, कंपनी ₹125 करोड़ से ₹150 करोड़ तक का निवेश करने की योजना बना रही है। इस पैसे से लगभग 400 KL की हाई-कम्प्लायंस रिएक्टर क्षमता बढ़ाई जाएगी। यह फंडिंग कंपनी के इंटरनल कैश फ्लो से आएगी। कंपनी को उम्मीद है कि 2027 तक इन नई सुविधाओं का 70% से 75% तक उपयोग हो जाएगा। Sekhmet ने हाल ही में यूनाइटेड स्टेट्स फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (USFDA) के तीन इंस्पेक्शन सफलतापूर्वक पास किए हैं। यह अमेरिका, यूरोप और जापान जैसे बाजारों की इनोवेटर फार्मा कंपनियों से बिजनेस हासिल करने के लिए एक ज़रूरी कदम है।

CDMO मॉडल की ओर स्ट्रैटेजिक बदलाव

मैनेजिंग डायरेक्टर संतोष माहिल के अनुसार, CDMO सेगमेंट पहले से ही कंपनी के कुल रेवेन्यू का लगभग 40% हिस्सा है और इसमें सालाना 40% से 50% की ग्रोथ देखी जा रही है। API प्रोडक्शन के विपरीत, जहां भारी प्राइस कंपटीशन का सामना करना पड़ता है, CDMO मॉडल लॉन्ग-टर्म पार्टनरशिप पर केंद्रित है। किसी खास कमर्शियल दवा के लिए मैन्युफैक्चरिंग साइट को क्वालिफाई करने में अक्सर पांच से सात साल लगते हैं। एक बार जब कोई कंपनी क्लाइंट द्वारा अप्रूव हो जाती है, तो प्रतिद्वंद्वियों के लिए उसे हटाना मुश्किल हो जाता है, जिससे प्रेडिक्टेबल, लॉन्ग-टर्म ऑर्डर्स सुरक्षित करने में मदद मिलती है।

मार्केट के ट्रेंड्स और भविष्य की राह

Sekhmet खुद को ग्लोबल सप्लाई चेन में हो रहे बदलावों का फायदा उठाने के लिए भी तैयार कर रही है। US Biosecure Act के चलते कई फार्मा इनोवेटर्स चीन के बाहर सप्लायर्स की तलाश कर रहे हैं। इसके अलावा, कंपनी संभावित अमेरिकी टैरिफ के लिए भी तैयारी कर रही है, खुद को एक क्वालिफाइड सप्लायर के तौर पर पेश करके जो सीधे अमेरिकी बाजार को बिल कर सके। जहां API बिजनेस में अक्सर कम मार्केट वैल्यूएशन देखने को मिलती है, वहीं इंटीग्रेटेड CDMO प्लेयर्स अपने स्पेशलाइज्ड काम और बेहतर प्रॉफिट मार्जिन के कारण आमतौर पर हाई वैल्यूएशन पर ट्रेड करते हैं।

कंपनी ने विशाखापत्तनम और चेन्नई के पास भविष्य की परियोजनाओं के लिए जमीन भी सुरक्षित कर ली है और वर्तमान में अपने पांच मौजूदा प्लांट्स को अपग्रेड कर रही है। फिलहाल, Sekhmet के पास इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) की कोई तत्काल योजना नहीं है और वह अपनी विस्तार योजनाओं को अपनी कमाई से ही फंड करने का इरादा रखती है। निवेशक इस बात पर बारीकी से नजर रखेंगे कि कंपनी इन नए रिएक्टर्स के निर्माण और कमीशनिंग को कितनी प्रभावी ढंग से मैनेज करती है और क्या वह अतिरिक्त क्षमता को भरने के लिए सफलतापूर्वक नए इनोवेटर क्लाइंट्स को साइन कर पाती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.