मेडिकल टेक क्षेत्र की दिग्गज कंपनी Science Corporation ने Stargardt बीमारी से जूझ रहे एक मरीज में सफलतापूर्वक PRIMA रेटिनल इम्प्लांट किया है। यह कंपनी के न्यूरोटेक्नोलॉजी प्रयासों में एक बड़ा मील का पत्थर है। ध्यान दें कि Science Corporation एक प्राइवेट कंपनी है और यह किसी भी स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड नहीं है।
दृष्टि वापस लाने की दिशा में बड़ा कदम
Science Corporation ने अपने क्लिनिकल डेवलपमेंट प्रोग्राम में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। Stargardt बीमारी के कारण मरीजों की सेंट्रल विजन धीरे-धीरे खत्म होने लगती है क्योंकि रेटिना की लाइट-सेंसिंग कोशिकाएं काम करना बंद कर देती हैं। कंपनी का PRIMA सिस्टम 2 मिलीमीटर का एक स्क्वायर इम्प्लांट है, जो रेटिना के नीचे फिट किया जाता है। यह एक कृत्रिम फोटोरेसेप्टर के रूप में काम करता है और कैमरा-युक्त चश्मों के जरिए विजुअल डेटा को सीधे ब्रेन तक इलेक्ट्रिकल सिग्नल के रूप में भेजता है।
प्राइवेट कंपनी का स्टेटस और वैल्यूएशन
निवेशकों के लिए यह जानना जरूरी है कि Science Corporation एक प्राइवेट, क्लिनिकल-स्टेज न्यूरोटेक्नोलॉजी फर्म है। इसका कोई भी शेयर स्टॉक मार्केट में ट्रेड नहीं होता है। मार्च 2026 में $230 मिलियन की सीरीज-सी फंडिंग के बाद कंपनी का कुल वैल्यूएशन $1.5 बिलियन तक पहुंच गया था। फिलहाल, इसमें निवेश केवल संस्थागत निवेशकों या प्राइवेट इक्विटी चैनलों के जरिए ही संभव है।
कमर्शियल प्रोग्रेस और रेगुलेटरी स्थिति
जुलाई 2026 में कंपनी को Dry AMD (एज-रिलेटेड मैकुलर डीजनरेशन) के इलाज के लिए PRIMA सिस्टम हेतु CE मार्क प्राप्त हुआ था। इसके बाद जर्मनी जैसे यूरोपीय बाजारों में इसका कमर्शियल लॉन्च शुरू हो चुका है। Stargardt के लिए किया गया यह नया प्रयोग अभी क्लिनिकल ट्रायल का हिस्सा है और यह कंपनी की मौजूदा कमर्शियल अप्रूवल से अलग है।
जोखिम और निगरानी के बिंदु
क्लिनिकल-स्टेज कंपनी होने के नाते, Science Corporation के सामने कई चुनौतियां हैं। अभी इसे अमेरिका में FDA अप्रूवल हासिल करना बाकी है। इसके अलावा, मेडिकल डिवाइस के लिए बीमा प्रतिपूर्ति (insurance reimbursement) हासिल करना, आंखों के डॉक्टरों द्वारा तकनीक को अपनाना और लंबी अवधि के क्लिनिकल परिणाम कंपनी की भविष्य की सफलता के लिए निर्णायक होंगे।
