नतीजों का असर: शेयर में आई बड़ी गिरावट
Sanofi India के शेयरों में 16 फरवरी 2026 को बड़ी गिरावट आई, शेयर लगभग 4% नीचे खुले। यह गिरावट कंपनी के दिसंबर 2025 को समाप्त तिमाही के कमज़ोर नतीजों के बाद आई। नेट प्रॉफिट पिछले साल की समान अवधि के ₹91.3 करोड़ से 32% घटकर ₹61.7 करोड़ पर आ गया। प्रॉफिट में आई इस गिरावट के साथ ही, कंपनी का रेवेन्यू 18% घटकर ₹515 करोड़ से ₹420 करोड़ पर पहुँच गया। यह लगातार तीसरी तिमाही है जब कंपनी का रेवेन्यू घटा है, जिससे निवेशकों की चिंताएं बढ़ गई हैं। नतीजों का असर ऐसा हुआ कि शेयर की कीमत 26 फरवरी 2026 को ₹4,008 के अपने 52-हफ्ते के निचले स्तर के करीब पहुँच गई।
सेक्टर के उलट चाल: कंपनी की परफॉरमेंस चिंताजनक
Sanofi India के ये नतीजे भारतीय फार्मा सेक्टर के बढ़िया आउटलुक से बिल्कुल अलग कहानी कहते हैं। जहाँ सेक्टर में 2026 में 7-9% की ग्रोथ का अनुमान है, वहीं Sanofi India का रेवेन्यू लगातार कम हो रहा है। दिसंबर तिमाही में 18% की गिरावट के साथ, पिछले 5 सालों में कंपनी का सेल्स ग्रोथ -8.74% रहा है। इसी तरह, पिछले 5 सालों में कंपनी की कमाई हर साल औसतन 13% घटी है, जबकि फार्मा इंडस्ट्री की कमाई 14.4% बढ़ी है। ऑपरेटिंग मार्जिन पर भी दबाव देखा गया, जो 130 बेसिस पॉइंट घटकर 21.6% पर आ गया। यह दिसंबर 2023 के बाद सबसे कम है। रेवेन्यू घटने और मार्जिन कम होने से यह सवाल उठता है कि क्या कंपनी अपने खर्चे ठीक से मैनेज कर पा रही है या अपने कॉम्पिटिटर्स के मुकाबले प्राइसिंग पावर कम हो गई है। Sanofi India का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो 26.4x से 29.6x के बीच है, जो Novartis India (19.1x) और Cipla (22.5x) जैसे कॉम्पिटिटर्स से ज़्यादा है। कंपनी की गिरती परफॉरमेंस को देखते हुए यह वैल्यूएशन थोड़ा ज़्यादा लग रहा है। हालांकि, कंपनी का रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) 43-49% के करीब है, लेकिन घटता रेवेन्यू और प्रॉफिट चिंता का विषय है। कंपनी का मार्केट कैप लगभग ₹9,200-9,500 करोड़ के आसपास है।
गहराई में जाएं: पुरानी दिक्कतें और रेगुलेटरी मुद्दे
रेवेन्यू में लगातार गिरावट और मार्जिन पर दबाव कंपनी की अंदरूनी समस्याओं की ओर इशारा करता है। लगातार तीसरी तिमाही में सेल्स गिरने से यह सवाल उठता है कि क्या कंपनी के प्रोडक्ट्स मार्केट की बदलती ज़रूरतों के हिसाब से कारगर हैं या नहीं। कंपनी का बैलेंस शीट भले ही मज़बूत हो और कर्ज़ कम हो, लेकिन पिछले 5 सालों में स्टॉक का परफॉरमेंस -24.61% रहा है, जबकि S&P 500 13.82% बढ़ा है। इसके अलावा, कंपनी को कुछ रेगुलेटरी मुश्किलों का भी सामना करना पड़ रहा है, जैसे ₹2.37 करोड़ का टैक्स डिमांड और 2015 में कंपटीशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) द्वारा कोल्यूसिव बिडिंग के लिए लगाया गया जुर्माना। ऑल इंडिया केमिस्ट्स एंड डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन ने भी Sanofi India के बिजनेस प्रैक्टिसेस को लेकर चिंताएं जताई हैं।
भविष्य का नज़रिया: एनालिस्ट्स की मिली-जुली राय
एनालिस्ट्स का Sanofi India को लेकर नज़रिया मिला-जुला है। कुछ ब्रोकरेज फर्म ₹6,200 से ₹9,170 के टारगेट प्राइस के साथ 'Buy' या 'Add' रेटिंग दे रहे हैं, वहीं UBS जैसे फर्म ने जनवरी 2026 में रेटिंग घटाई थी। कुछ एनालिस्ट्स इसे 'Neutral' रेटिंग दे रहे हैं। पूरे फाइनेंशियल ईयर 2025 (जो 31 दिसंबर 2025 को खत्म हुआ) के लिए, Sanofi India का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) 4% बढ़कर ₹3,267 मिलियन रहा, हालांकि रेवेन्यू 8.7% घटा। इसका एक कारण Zentiva के साथ कॉन्ट्रैक्ट का खत्म होना भी बताया गया। कंपनी ने FY25 के लिए ₹48 प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड घोषित किया है, जो मौजूदा सेल्स प्रेशर के बावजूद मैनेजमेंट के विश्वास को दिखाता है। हालांकि, तिमाही नतीजों में लगातार घटता रेवेन्यू और मार्जिन कंपनी की स्ट्रेटेजिक दिशा और कॉम्पिटिटिव पोजिशनिंग का गंभीर मूल्यांकन करने की ज़रूरत बताता है।