Sanofi Healthcare India को अपनी नई दवा Qfitlia के लिए CDSCO से हरी झंडी मिल गई है। हीमोफीलिया A और B के मरीजों के लिए यह एक बड़ी राहत है, क्योंकि इसमें अब साल में सिर्फ **6** इंजेक्शन की जरूरत होगी।
उपचार का बदला तरीका
CDSCO से मिली यह मंजूरी 12 साल और उससे अधिक उम्र के मरीजों के लिए है, जिसमें वे मरीज भी शामिल हैं जिनमें ट्रेडिशनल इलाज के प्रति एंटीबॉडीज (Factor VIII या IX inhibitors) विकसित हो चुके हैं। कंपनी की इस दवा को क्लिनिकल रूप में Fitusiran के नाम से भी जाना जाता है।
क्यों खास है यह दवा?
पारंपरिक इलाज में मरीजों को अक्सर ब्लीडिंग रोकने के लिए बार-बार इन्फ्यूजन (infusion) की जरूरत पड़ती है। Qfitlia ने इस बोझ को कम कर दिया है, क्योंकि अब साल में मात्र 6 इंजेक्शन ही पर्याप्त होंगे। इससे जोड़ों के नुकसान और अचानक ब्लीडिंग के खतरों को कम करने में मदद मिलेगी।
निवेशकों के लिए संकेत
भारतीय फार्मा मार्केट में अब कंपनियां जेनेरिक दवाओं के अलावा स्पेशलिटी मेडिसिन पर ज्यादा फोकस कर रही हैं ताकि मुनाफे को बढ़ाया जा सके। हालांकि, इस दवा की कीमत और मार्केट में इसकी पहुंच (penetration) पर नजर रखना जरूरी होगा। कंपनी की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे बीमा कवरेज और पेशेंट असिस्टेंस प्रोग्राम के जरिए इसे कितना किफायती बना पाते हैं। आने वाले क्वार्टर्स में इस ड्रग की बिक्री और कंपनी के रेवेन्यू मिक्स पर निवेशकों की नजरें बनी रहेंगी।
