Supreme Court ने अस्पतालों में दवाओं पर अत्यधिक मुनाफे (Markup) को लेकर सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने सभी दवाओं पर **16%** रिटेल मार्जिन कैप लगाने का सुझाव दिया है, जिससे Apollo, Fortis और Max Healthcare जैसे शेयरों में भारी दबाव देखा गया।
कोर्ट की चिंता और नया प्रस्ताव
भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने अस्पतालों के भीतर बिकने वाली दवाओं की कीमतों पर कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने दवाओं की खरीद कीमत और मरीजों से वसूली जा रही अंतिम कीमत के बीच के अंतर पर चिंता जताई है। कोर्ट ने यह भी कहा कि कई मामलों में रिटेल कीमत खरीद लागत से 10 गुना तक अधिक है।
मार्केट का रिएक्शन और असर
इस खबर के बाद शेयर बाजार में लिस्टेड हॉस्पिटल कंपनियों के शेयरों में हड़कंप मच गया। Apollo Hospitals, Fortis Healthcare और Max Healthcare जैसे दिग्गजों के शेयर 4% से 6% तक लुढ़क गए। निवेशकों को डर है कि अगर दवाओं के मार्जिन पर सरकारी नियंत्रण (Price Control) कड़ा होता है, तो इन अस्पतालों की फार्मेसी विंग से होने वाली कमाई पर बड़ा असर पड़ेगा।
वर्तमान में, केवल अनिवार्य दवाओं पर Drugs (Prices Control) Order (DPCO) 2013 के तहत मार्जिन सीमा लागू है। अब कोर्ट के इस नए सुझाव से पूरे सेक्टर के रेवेन्यू मॉडल के बदलने की आशंका है।
सरकार की प्रतिक्रिया और अगली राह
केंद्र सरकार ने माना है कि हेल्थकेयर सेक्टर में दवाओं की कीमतें काफी अधिक हैं और वे इस पर संतुलित समाधान तलाश रही है। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर, 2026 को तय है।
निवेशकों के लिए नजरें इस बात पर होनी चाहिए कि क्या सरकार कोर्ट के इस सुझाव को स्वीकार कर इसे कानून का हिस्सा बनाती है। साथ ही, Ayushman Bharat जैसी सरकारी योजनाओं पर पड़ने वाले बोझ के कारण भी सरकार भविष्य में सख्त रेगुलेशंस ला सकती है, जो सेक्टर के लिए एक बड़ा 'रेगुलेटरी ओवरहैंग' बना हुआ है।
