रूस के Irkutsk Anti-Plague Research Institute में एक **28** साल की रिसर्चर की मौत के बाद हड़कंप मच गया है। लैब में हुए एक संदिग्ध एक्सीडेंट के बाद बड़े पैमाने पर क्वारंटाइन लागू कर दिया गया है और बायोसेफ्टी प्रोटोकॉल की जांच शुरू हो गई है।
रशियन हेल्थ अथॉरिटीज ने डारिया शिपिलोवा की मौत के बाद करीब 200 लोगों को मेडिकल ऑब्जर्वेशन में रखा है। सितंबर के अंत में गंभीर निमोनिया के चलते हॉस्पिटल में भर्ती कराई गई इस रिसर्चर का 1 अक्टूबर, 2026 को निधन हो गया। एहतियात के तौर पर कई रीजनल हॉस्पिटल्स में लॉकडाउन जैसे हालात हैं ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।\n\n### क्या है लैब का मामला?\nस्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह हादसा लैब में एक टेस्ट ट्यूब टूटने के कारण हुआ, जिसमें प्लेग बैक्टीरिया के संपर्क में आने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, फेडरल अथॉरिटीज ने अभी तक किसी विशेष पैथोजन की पुष्टि नहीं की है, बस इसे 'बेहद खतरनाक संक्रमण' के रूप में देखा जा रहा है। यह संस्थान Rospotrebnadzor की देखरेख में चलता है।\n\n### इन्वेस्टर्स के लिए क्या है संकेत?\nभले ही यह सरकारी संस्थान है, लेकिन हेल्थकेयर और बायोटेक सेक्टर के लिए यह घटना 'ऑपरेशनल रिस्क' का बड़ा अलार्म है। ऐसी घटनाओं के बाद अक्सर पूरी दुनिया में लैब्स के लिए ऑडिट और बायोसेफ्टी गाइडलाइंस सख्त कर दी जाती हैं। आने वाले दिनों में बायोटेक और डायग्नोस्टिक रिसर्च कंपनियों के लिए कम्प्लायंस कॉस्ट (Compliance Cost) बढ़ने की उम्मीद है। मार्केट एक्सपर्ट्स अब इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि क्या इस घटना के बाद रशियन सरकार रिसर्च फंडिंग और लैब सुरक्षा नियमों में कोई बड़ा बदलाव करती है या नहीं।
