Roche के एग्जीक्यूटिव Jörg-Michael Rupp ने चेतावनी दी है कि मौजूदा हेल्थकेयर मॉडल बढ़ती उम्र और क्रॉनिक बीमारियों से निपटने में नाकाम हैं। कंपनी अब टेक्नोलॉजी-आधारित और प्रोएक्टिव केयर पर जोर दे रही है, जो निवेशकों के लिए लंबी अवधि में एक बड़ा संकेत है।
पुराने सिस्टम पर बढ़ता दबाव
Roche के सीनियर लीडरशिप ने वैश्विक स्तर पर हेल्थकेयर ढांचे में बुनियादी बदलाव की मांग की है। कंपनी के इंटरनेशनल एरिया हेड Jörg-Michael Rupp का मानना है कि मौजूदा सिस्टम को पुरानी बीमारियों (जैसे कैंसर, डायबिटीज और दिल की बीमारी) के बजाय छोटी अवधि के उपचार के हिसाब से बनाया गया था, जो अब नाकाफी साबित हो रहा है।
रिएक्टिव से प्रोएक्टिव अप्रोच की ओर
कंपनी का तर्क है कि हेल्थकेयर को केवल एक खर्च के बजाय निवेश के रूप में देखा जाना चाहिए। मौजूदा 'रिएक्टिव' मॉडल, जो बीमारी बढ़ने के बाद अस्पताल में भर्ती पर जोर देता है, अब वैश्विक इकोनॉमी के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। रिपोर्ट्स के अनुसार, लाइलाज बीमारियों के कारण ग्लोबल GDP का 15% तक उत्पादकता नुकसान (Productivity Loss) हो रहा है, जिसे रोकने के लिए एडमिनिस्ट्रेटिव फ्रेमवर्क में बदलाव जरूरी है।
कंपनी का विजन और R&D निवेश
Roche इनोवेशन की राह पर मजबूती से आगे बढ़ रही है। कंपनी ने 2025 में लगभग CHF 61.5 बिलियन की ग्रुप सेल्स दर्ज की है, जिसमें से CHF 12 बिलियन सालाना रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) में निवेश किए जा रहे हैं। कंपनी का 75% क्लिनिकल डेवलपमेंट पाइपलाइन क्रॉनिक बीमारियों पर केंद्रित है। इस दिशा में कदम बढ़ाकर Roche खुद को हॉस्पिटल-आधारित मॉडल से हटाकर इंटीग्रेटेड केयर की ओर ले जा रही है।
सेक्टर के लिए संकेत
यह चेतावनी इस बात का संकेत है कि भविष्य में सरकारी पॉलिसी और प्रोक्योरमेंट स्ट्रैटेजी में बड़ा बदलाव आ सकता है। जिन कंपनियों के पास डायग्नोस्टिक टूल्स और टारगेटेड फार्मास्यूटिकल थेरेपी का इंटीग्रेटेड सॉल्यूशन है, उन्हें सरकारी बजट आवंटन में फायदा मिल सकता है। निवेशकों के लिए उभरते बाजारों (Emerging Economies) पर नजर रखना जरूरी है, क्योंकि वहां हेल्थकेयर का नया और बेहतर ढांचा तैयार करने का बड़ा अवसर है।
