रेड लाइट थेरेपी का बाजार ₹9,000 करोड़ पार! घर पर खूबसूरती और सेहत का नया ट्रेंड, पर एक्सपर्ट्स ने दी चेतावनी

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
रेड लाइट थेरेपी का बाजार ₹9,000 करोड़ पार! घर पर खूबसूरती और सेहत का नया ट्रेंड, पर एक्सपर्ट्स ने दी चेतावनी

रेड लाइट थेरेपी का ग्लोबल बाजार 2025 में जहां लगभग ₹4,400 करोड़ का था, वहीं 2033 तक यह ₹9,400 करोड़ से ज्यादा पहुंचने का अनुमान है। घर पर वेलनेस और कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट की बढ़ती मांग से इस सेक्टर में तेजी देखी जा रही है, खासकर एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में। हालांकि, मेडिकल एक्सपर्ट्स ने डिवाइस की क्वालिटी और सही इस्तेमाल को लेकर चेतावनी दी है, क्योंकि कॉस्मेटिक फायदों के लिए इसके क्लिनिकल सबूत मिले-जुले हैं।

घर-घर पहुंचेगा सेहत और खूबसूरती का 'रेड लाइट'

वेलनेस इंडस्ट्री में अब नॉन-इनवेसिव टेक्नोलॉजी का बोलबाला है। रेड लाइट थेरेपी, जो पहले सिर्फ खास डर्मेटोलॉजी और रिहैबिलिटेशन क्लीनिक्स में मिलती थी, अब आम लोगों की पहुँच में आ गई है। यह टेक्नोलॉजी खास रेड और नियर-इन्फ्रारेड लाइट वेवलेंथ का इस्तेमाल करती है, जो सेल्स को एनर्जी देने का काम करती हैं। अब यह क्लिनिक से निकलकर घरों तक पहुँच चुकी है, जहाँ LED फेशियल मास्क, बाल उगाने वाले डिवाइस और दर्द निवारक इक्विपमेंट्स जैसे कई तरह के कंज्यूमर प्रोडक्ट्स मौजूद हैं।

मार्केट में बंपर ग्रोथ की उम्मीद

इस सेक्टर में जबरदस्त विस्तार होने की उम्मीद है। 2025 में जहां ग्लोबल मार्केट का साइज लगभग $533.8 मिलियन (लगभग ₹4,400 करोड़) आँका गया है, वहीं 2033 तक यह $1.13 बिलियन (लगभग ₹9,400 करोड़) से ऊपर जा सकता है। यह एक लगातार ग्रोथ का संकेत है। फिलहाल, कॉस्मेटिक इस्तेमाल से मार्केट की लगभग 60% मांग पूरी हो रही है। एशिया-पैसिफिक रीजन को एक बड़ा ग्रोथ एरिया माना जा रहा है, क्योंकि यहाँ लोग घर पर इस्तेमाल होने वाले हेल्थ और पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स पर ज्यादा खर्च कर रहे हैं।

लग्जरी होटलों से लेकर घरों तक...

सिर्फ घरों में ही नहीं, बल्कि लग्जरी होटलों और वेलनेस सेंटर्स, जैसे कि मुंबई के फेयरमोंट (Fairmont Mumbai) में भी इन थेरेपी को सर्विस मेन्यू में शामिल किया जा रहा है। यह हेल्थ और लॉन्गविटी को लेकर बढ़ते फोकस का नतीजा है। इन सर्विसेस की पॉपुलैरिटी की एक बड़ी वजह इनका नॉन-इनवेसिव होना और मॉडर्न कंज्यूमर की लाइफस्टाइल-बेस्ड हेल्थ इम्प्रूवमेंट की पसंद के साथ फिट बैठना है।

कितना भरोसेमंद है ये 'चमत्कार'?

इस थेरेपी का मुख्य मैकेनिज्म 'फोटोबायोमोड्यूलेशन' (Photobiomodulation) कहलाता है, जिसमें खास वेवलेंथ (630–1,100 nm) सेल्स के माइटोकॉन्ड्रिया पर असर डालती हैं। NASA के 1990 के दशक के शुरुआती रिसर्च के साथ-साथ कुछ स्टडीज में टिश्यू रिपेयर और घाव भरने में इसके संभावित फायदों का जिक्र है। हालांकि, कई कॉस्मेटिक दावों के लिए अभी भी मजबूत क्लिनिकल प्रूफ का इंतजार है। मेडिकल प्रोफेशनल्स का कहना है कि रेड लाइट थेरेपी पिगमेंटेशन या एजिंग जैसी हर स्किन प्रॉब्लम का रामबाण इलाज नहीं है।

निवेशकों और ग्राहकों के लिए जरूरी बातें

इस फील्ड में निवेश करने या प्रोडक्ट्स खरीदने वालों को मेडिकल-ग्रेड इक्विपमेंट और सस्ते कंज्यूमर डिवाइस के बीच का अंतर समझना बहुत जरूरी है। घर पर इस्तेमाल होने वाले प्रोडक्ट्स की इफेक्टिवनेस सही लाइट वेवलेंथ, डोसेज और लगातार इस्तेमाल पर निर्भर करती है। सेफ्टी सबसे बड़ा मुद्दा है, खासकर उन स्किन कंडीशंस के लिए जहां इसके फायदों के पुख्ता सबूत नहीं हैं, और फोटोसेंसिटिविटी (photosensitivity) वाले लोगों के लिए संभावित रिस्क भी हैं। इंडस्ट्री का फ्यूचर प्रोडक्ट की एफिकेसी, हेल्थ क्लेम्स पर रेगुलेटरी निगरानी और मैन्युफैक्चरर्स द्वारा FDA क्लीयरेंस या CE मार्किंग जैसे ट्रांसपेरेंट टेक्निकल स्पेसिफिकेशन्स देने की क्षमता पर निर्भर करेगा, ताकि हाई-क्वालिटी डिवाइसेस को अनवेरिफाइड प्रोडक्ट्स से अलग पहचाना जा सके।

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