सितंबर 2026 में 107 गुना सब्सक्राइब हुए Rays of Belief के IPO ने निवेशकों को निराश किया है। कंपनी अब अपने ₹239 के इश्यू प्राइस से नीचे कारोबार कर रही है, जिससे निवेशकों के बीच बिजनेस मॉडल की स्केलेबिलिटी को लेकर चिंता बढ़ गई है।
IPO की धमाकेदार शुरुआत और वर्तमान स्थिति
Rays of Belief Ltd (Mom’s Belief ब्रांड की ओनर) ने 8 सितंबर, 2026 को जब मार्केट में कदम रखा था, तो निवेशक इसके लिए टूट पड़े थे। ₹125 करोड़ के इस IPO को 107 गुना से ज्यादा सब्सक्रिप्शन मिला था। हालांकि, शुरुआती उत्साह ठंडा पड़ता दिख रहा है और फिलहाल यह शेयर ₹226 से ₹230 के दायरे में ट्रेड कर रहा है, जो इसके ₹239 के इश्यू प्राइस से नीचे है।
मुनाफे की राह पर, फिर भी संशय क्यों?
कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में ₹2.79 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल के ₹53.7 लाख के नुकसान के मुकाबले एक बड़ा सुधार है। कंपनी तेजी से विस्तार कर रही है और मार्च 2026 तक भारत के 57 शहरों में इसके 136 सेंटर और अमेरिका में 3 सेंटर काम कर रहे हैं।
निवेशकों की चिंता की असली वजह
इतने विस्तार के बावजूद बाजार सतर्क है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
- स्टाफ की चुनौती: यह बिजनेस पूरी तरह से एक्सपर्ट थेरेपिस्ट पर निर्भर है। तेजी से विस्तार करने पर लागत (Cost) बढ़ने और सर्विस क्वालिटी गिरने का डर है।
- अफोर्डेबिलिटी: ऑटिज्म जैसी बीमारियों के इलाज का खर्च परिवारों पर भारी पड़ता है। कई बीमा पॉलिसियां इन्हें कवर नहीं करतीं। कंपनी ने अपने प्रोप्रायटरी इंश्योरेंस प्लान के जरिए मार्च 2026 तक 429 बच्चों को कवर किया है, लेकिन क्या यह बिजनेस मॉडल मुनाफे के साथ-साथ आम जनता के लिए किफायती बना रहेगा, यह बड़ा सवाल है।
अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि क्या कंपनी अपनी बढ़ती सेंटर नेटवर्क की लागत को नियंत्रित रख पाएगी या मार्जिन पर दबाव बरकरार रहेगा।
