Poly Medicure ने अपनी मैन्युफैक्चरिंग को भारत शिफ्ट करने का बड़ा फैसला लिया है। यूरोप की दो कंपनियों के अधिग्रहण के बाद, कंपनी का लक्ष्य 2030 तक हर साल 30 नए प्रोडक्ट्स लॉन्च करना और महंगी इम्पोर्टेड डिवाइसेज का विकल्प तैयार करना है।
स्वदेशी मैन्युफैक्चरिंग पर दांव
Poly Medicure ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए मैन्युफैक्चरिंग का केंद्र भारत को बनाया है। हाल ही में इटली की Citieffe Group और नीदरलैंड्स की PendraCare Group के अधिग्रहण के बाद, कंपनी अब इन अंतरराष्ट्रीय कारोबारों को भारतीय प्रोडक्शन चेन से जोड़ रही है। इसका मुख्य मकसद मैन्युफैक्चरिंग लागत को कम करना और एक मजबूत स्थानीय सप्लाई चेन बनाना है।
नई फैसिलिटीज और विजन
कंपनी हरियाणा और उत्तर प्रदेश के मेडिकल पार्क में नई प्रोडक्शन फैसिलिटीज खोलने की तैयारी कर रही है। 390 से ज्यादा पेटेंट्स के साथ, Poly Medicure का विजन 2030 तक हर साल 25 से 30 नए प्रोडक्ट्स लॉन्च करने का है। ये प्रोडक्ट्स मुख्य रूप से कार्डियक केयर, ऑर्थोपेडिक्स, नेफ्रोलॉजी और ऑन्कोलॉजी जैसे हाई-डिमांड सेक्टर पर केंद्रित होंगे।
फाइनेंशियल टारगेट और चुनौतियां
कंपनी ने इस फाइनेंशियल ईयर के लिए लगभग ₹2,300 करोड़ का रेवेन्यू टारगेट रखा है, जो पिछले ₹1,875 करोड़ के बेस से काफी ज्यादा है। वर्तमान में कंपनी का 70% रेवेन्यू एक्सपोर्ट से आता है, जिससे यह भारत की दूसरी सबसे बड़ी मेडिकल डिवाइस कंपनी बनी हुई है। हालांकि, लाल सागर (Red Sea) और होर्मुज रूट पर चल रहे तनाव से फ्रेट लागत बढ़ी है। इसके अलावा, प्लास्टिक की बढ़ती कीमतों और अमेरिकी टैरिफ नीतियों के कारण कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव देखा जा सकता है, जिस पर निवेशकों को बारीक नजर रखनी होगी।
