मेडिकल डिवाइस बनाने वाली कंपनी Poly Medicure ने साल 2030 तक अपनी इंटरनेशनल रेवेन्यू को दोगुना करने का प्लान बनाया है। इसके लिए कंपनी नए मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स और **50** से ज़्यादा नए प्रोडक्ट्स लॉन्च करेगी। हालांकि, कंपनी का मानना है कि अगले चार सालों में डोमेस्टिक ऑपरेशंस एक्सपोर्ट से ज़्यादा तेज़ी से बढ़ेंगे।
एक्सपोर्ट में बड़े लक्ष्य
Poly Medicure ने साल 2030 तक अपने इंटरनेशनल बिजनेस रेवेन्यू को दोगुना करने की एक स्ट्रैटेजिक योजना की घोषणा की है। कंपनी मैनेजमेंट के अनुसार, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए दो नए मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स लगाए जाएंगे और क्रिटिकल केयर, कार्डियोलॉजी, ऑन्कोलॉजी और वैस्कुलर एक्सेस जैसे सेग्मेंट्स में 50 से ज़्यादा नए प्रोडक्ट्स पेश किए जाएंगे।
पिछले फाइनेंशियल ईयर में, कंपनी का इंटरनेशनल रेवेन्यू ₹1,280.2 करोड़ रहा था, जो कुल रेवेन्यू ₹1,875.3 करोड़ का लगभग 68% था। इस विस्तार को गति देने के लिए कंपनी का फोकस ग्लोबल साउथ के देशों, जैसे कि साउथईस्ट एशिया, लैटिन अमेरिका, अफ्रीका और मध्य पूर्व के मार्केट्स पर रहेगा।
डोमेस्टिक ग्रोथ और मैन्युफैक्चरिंग
इंटरनेशनल विस्तार एक अहम लक्ष्य होने के बावजूद, कंपनी को उम्मीद है कि उसका डोमेस्टिक बिजनेस ग्रोथ का मुख्य जरिया बनेगा। मैनेजमेंट का अनुमान है कि अगले चार से पांच सालों में डोमेस्टिक रेवेन्यू में सालाना 20% से 25% तक की ग्रोथ देखी जाएगी, जो एक्सपोर्ट ग्रोथ रेट 15% से 20% से ज़्यादा हो सकती है। डोमेस्टिक मार्केट में रीनल केयर, कार्डियोलॉजी और क्रिटिकल केयर प्रोडक्ट्स की बढ़ती मांग इस ग्रोथ को सपोर्ट करेगी। कंपनी लोकल मैन्युफैक्चरिंग का फायदा उठाकर कॉस्ट कम करने की योजना बना रही है, जिससे भारत में सिंगल-यूज़ डायलिसिस डिवाइसेस को ज़्यादा अपनाने में मदद मिलेगी।
स्ट्रैटेजिक सिचुएशन
चीन से सप्लाई चेन के ग्लोबल शिफ्ट के बारे में कंपनी ने कहा कि भारत ने अभी तक इस बदलाव का बड़ा फायदा नहीं उठाया है। जहां पहले के फेज में वियतनाम और मलेशिया जैसे देशों ने मैन्युफैक्चरिंग हब के तौर पर फायदा उठाया, वहीं कंपनी का मानना है कि भविष्य के फेज, खासकर हाई-टेक मेडिकल डिवाइसेस से जुड़े, भारतीय निर्माताओं के लिए यूरोपियन मार्केट्स में सप्लाई करने के लिए ज़्यादा अनुकूल माहौल बना सकते हैं।
निवेशकों के लिए खास बातें
निवेशकों के लिए इस स्ट्रैटेजी की सफलता कुछ फैक्टर्स पर निर्भर करेगी, जैसे कि दो नए मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स का समय पर पूरा होना और नए प्रोडक्ट पाइपलाइन की रेगुलेटरी अप्रूवल और कमर्शियल लॉन्च। इसके अलावा, निवेशक यह भी देखेंगे कि कंपनी अपने डोमेस्टिक ग्रोथ टारगेट्स को कैसे बनाए रखती है और इमर्जिंग मार्केट्स में प्राइसिंग प्रेशर को कैसे हैंडल करती है। बड़े कैपिटल-इंटेंसिव प्रोजेक्ट्स को स्केल करते हुए मार्जिन्स को बनाए रखना आने वाली क्वार्टरली अपडेट्स में निगरानी का एक अहम क्षेत्र रहेगा।
