Poly Medicure: सेल्स में **16%** का दम, पर खास खर्चों का झटका! जानें क्यों गिरा नेट प्रॉफिट

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Poly Medicure: सेल्स में **16%** का दम, पर खास खर्चों का झटका! जानें क्यों गिरा नेट प्रॉफिट
Overview

Poly Medicure Limited ने Q3 FY26 के लिए अपने नतीजे जारी किए हैं, जिसमें कंपनी का रेवेन्यू **16.4%** बढ़कर **₹493.7 करोड़** हो गया है। हालांकि, खास खर्चों के कारण कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट (PAT) **16.9%** घटकर **₹70.8 करोड़** रह गया।

📉 नतीजों की पूरी कहानी

Poly Medicure Limited ने Q3 फाइनेंशियल ईयर 2026 के नतीजे पेश किए। कंपनी ने अपनी टॉप-लाइन (Revenue) में 16.4% का शानदार ईयर-ऑन-ईयर (YoY) ग्रोथ दर्ज किया, जो ₹493.7 करोड़ पर पहुंच गया। इस ग्रोथ में इंटरनेशनल सेल्स का योगदान 16.6% और डोमेस्टिक सेल्स का 16.2% रहा। वहीं, पिछले नौ महीनों (9M FY26) में कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 9.1% बढ़कर ₹1340.7 करोड़ हो गया।

हालांकि, बॉटम लाइन (Bottom Line) पर थोड़ी मायूसी रही। Q3 FY26 में कंसोलिडेटेड Profit After Tax (PAT) में 16.9% की ईयर-ऑन-ईयर (YoY) गिरावट आई और यह ₹70.8 करोड़ पर आ गया। इसके पीछे ₹13.3 करोड़ के खास (extraordinary) खर्चे थे, जिनमें रिवाइज्ड लेबर कोड के लिए ₹6.8 करोड़ और PendraCare व Citieffe ग्रुप्स के एक्विजिशन से जुड़े ₹6.5 करोड़ शामिल हैं।

स्टैंडअलोन (Standalone) आधार पर, रेवेन्यू में 1.9% की मामूली बढ़त के साथ ₹418.9 करोड़ रहा, जबकि PAT 8.0% गिरकर ₹78.4 करोड़ पर आ गया।

ऑपरेटिंग EBITDA की बात करें तो Q3 FY26 में कंसोलिडेटेड ऑपरेशंस 2.8% बढ़कर ₹119.4 करोड़ हो गया। लेकिन, EBITDA मार्जिन 319 बेस पॉइंट्स घटकर 24.2% पर आ गया, जो एक्विजिशन कॉस्ट को छोड़कर है। कंपनी ने बताया कि 9M FY26 के लिए कंसोलिडेटेड EBITDA 2.7% बढ़कर ₹345.3 करोड़ रहा, जिसका मार्जिन 25.8% रहा, जो उनके 25-27% के गाइडेंस रेंज में है।

🚀 भविष्य की राह और नए कदम

कंपनी ने PendraCare Group और Citieffe Group को सफलतापूर्वक इंटीग्रेट (Integrate) किया है, जिसका असर इस तिमाही के नतीजों पर दिख रहा है। Poly Medicure ने 9M FY26 में 19 नए प्रोडक्ट्स लॉन्च किए हैं, जिससे भविष्य के लिए ग्रोथ की नींव रखी जा रही है।

एक बड़ा डेवलपमेंट यह है कि कंपनी को DCGI (ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया) से इंट्रावीनस लिथोट्रिप्सी (IVL) सिस्टम और ड्रग एल्यूटिंग बलून (DEB) के लिए अप्रूवल मिल गया है। RisoR स्टेंट क्लिनिकल स्टडी भी अच्छी चल रही है, जिसमें 200 से ज्यादा पेशेंट्स एनरोल हो चुके हैं, जो कार्डियोवैस्कुलर प्रोडक्ट्स के लिए बड़ा संकेत है।

🚩 जोखिम और आगे की उम्मीदें

जोखिमों की बात करें तो, छोटे अवधि में खास खर्चों का प्रॉफिट पर असर और एक्विजिशन के इंटीग्रेशन में आने वाली चुनौतियां शामिल हैं। अगर मार्जिन पर दबाव बना रहा, तो यह निवेशकों की भावना को प्रभावित कर सकता है।

आगे की उम्मीदें: निवेशकों को नई एक्वायर की गई कंपनियों के परफॉरमेंस और हाल ही में अप्रूव हुए IVL और DEB सिस्टम्स की कमर्शियल लॉन्चिंग पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। कंपनी की ₹839.8 करोड़ की मजबूत लिक्विडिटी पोजीशन और 9M FY26 में ₹234 करोड़ का कैपिटल एक्सपेंडिचर (कैपेक्स) ग्रोथ में लगातार निवेश को दिखाता है। मैनेजमेंट का R&D पर फोकस और नए प्रोडक्ट्स लॉन्च करने की रणनीति, साथ ही ट्रेड डील्स और बजट की उम्मीदों के चलते MedTech सेक्टर की पॉजिटिव आउटलुक, नियर-टर्म प्रॉफिट के दबाव के बावजूद एक स्ट्रैटेजिक लॉन्ग-टर्म दिशा का संकेत देती है।

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