रेवेन्यू में ग्रोथ, पर मुनाफे पर गिरी गाज!
Poly Medicure के ताजा नतीजों ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है: कैसे रेवेन्यू तो बढ़ रहा है, लेकिन मुनाफा घट रहा है? मेडिकल डिवाइस बनाने वाली इस कंपनी का रेवेन्यू चौथी तिमाही में 21.3% की उछाल के साथ ₹534.5 करोड़ तक पहुंच गया। लेकिन, यही मुनाफा 27.8% लुढ़क कर ₹66.3 करोड़ पर आ गया। कंपनी का कहना है कि ऑपरेशनल दिक्कतें और बढ़े हुए खर्चे इसकी वजह हैं, जिससे EBITDA मार्जिन पिछले साल के 27.1% से फिसलकर 20.6% पर आ गया। इस बीच, कंपनी ने ₹3.5 प्रति शेयर का डिविडेंड देने का फैसला किया है।
नए सेगमेंट्स में दिख रही मुश्किलें
बढ़त के बावजूद, मुनाफे में आई यह गिरावट Poly Medicure के नए कार्डियोलॉजी (Cardiology) और क्रिटिकल केयर (Critical Care) डिवीजन्स में विस्तार की चुनौतियों की ओर इशारा करती है। कंपनी तीन नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स लगाने की योजना बना रही है। लेकिन, इन जटिल प्रोडक्ट लाइन्स को विकसित करने में आ रहा खर्च फिलहाल मुनाफे पर भारी पड़ रहा है। नतीजों के बाद सोमवार को Poly Medicure के शेयर 5% तक गिर गए। कंपनी का वैल्यूएशन, जिसका ट्रेलिंग P/E रेश्यो 45x से ऊपर है, इंडस्ट्री के बाकी खिलाड़ियों के मुकाबले काफी ज्यादा माना जा रहा है, ऐसे में इस तरह के नतीजे चिंता बढ़ाते हैं।
रिस्क और वैल्यूएशन पर सवाल
मार्केट में बढ़ते कॉम्पिटिशन के बीच मार्जिन पर बना दबाव Poly Medicure के लिए एक बड़ा रिस्क है। एक्सपोर्ट में आ रही दिक्कतें और इंटरनेशनल सप्लायर्स द्वारा इन्वेंटरी घटाने जैसे फैक्टर्स ने हालिया ग्रोथ को प्रभावित किया है। कंपनी का एक्सपेंशन और हाई-कॉम्प्लेक्सिटी प्रोडक्ट्स पर फोकस R&D में लगातार निवेश की मांग करता है, जिससे फिलहाल नेट मार्जिन कम रहने की संभावना है। मेडिकल इक्विपमेंट इंडस्ट्री के मीडियन P/E के मुकाबले कंपनी का वैल्यूएशन भी थोड़ा स्ट्रेच्ड दिख रहा है। कंपनी के इतिहास को देखें तो, बड़े कैपिटल स्पेंडिंग के बावजूद लगातार ग्रोथ बनाए रखने पर सवाल उठते रहे हैं।
आगे का रास्ता
भविष्य को देखते हुए, Poly Medicure अपने कार्डियोलॉजी और रीनल केयर (Renal Care) जैसे हाई-मार्जिन वाले प्रोडक्ट्स पर फोकस कर रही है। एनालिस्ट कंपनी की कैपेसिटी एक्सपेंशन योजनाओं पर कड़ी नजर रखे हुए हैं, फाइनेंशियल ईयर 2027 (FY27) को मुनाफे में बढ़ोतरी के लिए एक अहम साल माना जा रहा है। मैनेजमेंट का भरोसा है कि नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के पूरी तरह चालू होने के बाद, वे इकोनॉमीज़ ऑफ स्केल (Economies of scale) का फायदा उठा पाएंगे, जिससे मार्जिन स्थिर होंगे और लॉन्ग-टर्म स्टॉक प्राइस टारगेट को सपोर्ट मिलेगा।
