तिमाही नतीजों का हाल: रेवेन्यू का लक्ष्य पूरा, EBITDA में चूकी कंपनी
Piramal Pharma ने फाइनेंशियल ईयर 2026 की चौथी तिमाही में एनालिस्ट्स के रेवेन्यू अनुमानों को पूरा किया। लेकिन, मार्जिन पर दबाव की वजह से कंपनी का EBITDA (Earnings Before Interest, Taxes, Depreciation, and Amortisation) उम्मीद से 8% कम रहा। कंपनी के मैनेजमेंट का कहना है कि प्रोडक्ट मिक्स में हुए बड़े बदलाव के कारण EBITDA मार्जिन घटकर 18% पर आ गया, जो पिछले साल की इसी अवधि से कम है। वहीं, टैक्स रेट में आई कमी ने कंपनी के नेट प्रॉफिट को अनुमानों से ऊपर पहुंचाने में मदद की।
CDMO और कंज्यूमर हेल्थ में मजबूती, पर FY27 के लिए बायोटेक फंडिंग पर नजर
कंपनी का कॉन्ट्रैक्ट डेवलपमेंट एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑर्गनाइजेशन (CDMO) सेगमेंट चौथी तिमाही में पिछले अवधियों की तुलना में धीमी रफ्तार से गिरा है। अगर किसी खास 'ऑन-पैटेंट' मॉलिक्यूल की इन्वेंट्री में कमी को छोड़ दें, तो CDMO बिजनेस इस तिमाही और पूरे फाइनेंशियल ईयर के लिए बढ़ा है। खासतौर पर, Antibody-Drug Conjugate (ADC) सेगमेंट ने FY26 में $64 मिलियन की सेल्स जेनरेट की, जो इस हाई-ग्रोथ एरिया में कंपनी की क्षमता को दिखाता है। कंज्यूमर हेल्थकेयर (CHG) डिवीजन ने भी अच्छा प्रदर्शन किया, जिसके पावर ब्रांड्स ने FY26 में 24% का ईयर-ओवर-ईयर ग्रोथ दिया और ई-कॉमर्स सेल्स 48% बढ़ी।
प्रॉफिट पर दबाव, पर एनालिस्ट्स का भरोसा बरकरार
फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए Piramal Pharma का आउटलुक काफी हद तक बायोटेक फंडिंग में संभावित सुधार पर निर्भर करता है, जो मौजूदा ग्लोबल कैपिटल मार्केट की अनिश्चितताओं के बीच एक बड़ा सवाल है। भारतीय CDMO मार्केट के तेजी से बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन इसमें बढ़ती प्रतिस्पर्धा और लगातार निवेश की जरूरत है। कंपनी का मौजूदा वैल्यूएशन दिखाता है कि उसका लास्ट 12 मंथ (TTM) प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो नेगेटिव है (लगभग -96 से -120), जबकि सेक्टर का औसत P/E रेश्यो लगभग 43.56 है। यह कंपनी की मौजूदा प्रॉफिटेबिलिटी की चुनौतियों को उजागर करता है। इन सब के बावजूद, एनालिस्ट्स स्टॉक पर 'स्ट्रॉन्ग बाय' रेटिंग बनाए हुए हैं और उनका 12 महीने का टारगेट प्राइस ₹200 से ₹228 के बीच है।
जोखिम: एसेट इम्पेयरमेंट, USFDA की टिप्पणियां और फंडिंग की अनिश्चितता
कंपनी के सामने कई बड़े जोखिम भी हैं। Piramal Pharma ने चौथी तिमाही में इनटैन्जिबल एसेट्स पर ₹176 करोड़ का भारी इम्पेयरमेंट लॉस दर्ज किया है, जो बताता है कि अपेक्षित आर्थिक लाभ शायद ही मिल पाएं। इसके तेलंगाना स्थित मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को फरवरी 2026 में USFDA (यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन) से एक फॉर्म 483 मिला है, जिसमें प्रोसेस इम्प्रूवमेंट को लेकर चार ऑब्जर्वेशन (टिप्पणियां) हैं। हालांकि, ये डेटा इंटीग्रिटी के मुद्दे नहीं हैं, पर ऐसे ऑब्जर्वेशन कंप्लायंस में बाधा और देरी का कारण बन सकते हैं। FY27 की ग्रोथ के लिए कंपनी का बायोटेक फंडिंग पर भारी निर्भर रहना एक बड़ा एक्सटर्नल रिस्क है।
एनालिस्ट्स को FY27 में वापसी की उम्मीद, लंबी अवधि के बड़े लक्ष्य
आगे देखते हुए, मोतीलाल ओसवाल (Motilal Oswal) ने 'BUY' रेटिंग और INR 190 का टारगेट प्राइस बरकरार रखा है। वे उम्मीद करते हैं कि Piramal Pharma फाइनेंशियल ईयर 2027 में बेहतर ग्रोथ हासिल करेगी। यह अनुमान बायोटेक फंडिंग में वापसी और CHG सेगमेंट में लागत में कमी की उम्मीदों पर आधारित है। एनालिस्ट्स का अनुमान है कि 2027 तक रेवेन्यू ₹103.4 बिलियन (17% की बढ़ोतरी) तक पहुंच जाएगा और कंपनी फिर से प्रॉफिटेबिलिटी में लौट आएगी, जिसका EPS ₹2.97 रहने की उम्मीद है। कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2030 के लिए भी बड़े लक्ष्य रखे हैं: $2 बिलियन का रेवेन्यू, 25% का EBITDA मार्जिन और हाई-टीन ROCE (Return on Capital Employed)। इन महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को पाने के लिए कंपनी को मौजूदा मार्जिन दबाव को मैनेज करना होगा और बायोटेक्नोलॉजी फंडिंग में संभावित रिकवरी का फायदा उठाना होगा।
