Piramal Pharma ने सप्लाई चेन जोखिम कम करने के लिए चीन से कच्चा माल मंगाना घटाकर सिंगल-डिजिट में कर दिया है। कंपनी ने दूसरी तिमाही में **28%** की मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है और अब Bayer के साथ डिस्ट्रीब्यूशन कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने की चुनौतियों के लिए कमर कस रही है।
सप्लाई चेन में बड़ा बदलाव
Piramal Pharma ने रणनीतिक रूप से चीन से कच्चे माल की खरीद को घटाकर सिंगल-डिजिट प्रतिशत पर ला दिया है। कंपनी का कहना है कि यह कदम भविष्य के भू-राजनीतिक जोखिमों (geopolitical risks) से बचने के लिए उठाया गया है। अब कंपनी भारत, यूके और अमेरिका जैसे देशों से सोर्सिंग बढ़ाकर अपनी ऑपरेशनल स्टेबिलिटी को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है।
शानदार नतीजे और गाइडेंस
कंपनी का प्रदर्शन काफी दमदार रहा है। दूसरी तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू सालाना आधार पर 28% बढ़कर ₹2,617 करोड़ पहुंच गया है। इस मजबूत प्रदर्शन के दम पर कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए अपनी ग्रोथ गाइडेंस को 19% से 20% के बीच रखा है। कंपनी अब अपना ध्यान सामान्य उत्पादों के बजाय कॉम्प्लेक्स इंजेक्शन और हाई-पोटेंसी दवाओं जैसे प्रीमियम प्रोडक्ट्स पर लगा रही है, जिनमें बेहतर मार्जिन मिलता है।
Bayer के साथ खत्म हो रहा रिश्ता
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी खबर यह है कि दिसंबर में Bayer के साथ कंपनी का पुराना डिस्ट्रीब्यूशन एग्रीमेंट खत्म होने वाला है। इस पार्टनरशिप से कंपनी को सालाना ₹475 करोड़ का रेवेन्यू मिलता था। हालांकि, मैनेजमेंट का मानना है कि इससे मुनाफे पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा क्योंकि यह बिजनेस पतले मार्जिन पर चलता था। इस कमी को पूरा करने के लिए कंपनी अपने कंज्यूमर हेल्थकेयर डिवीजन के ब्रांड्स को बढ़ाने पर फोकस कर रही है।
क्या है भविष्य की योजना?
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल वे GLP-1 ड्रग्स जैसे अत्यधिक प्रतिस्पर्धी बाजार में नहीं उतरेंगे। इसके बजाय वे कॉम्प्लेक्स पेप्टाइड्स जैसे निश (niche) सेगमेंट पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। आने वाली तिमाहियों में यह देखना अहम होगा कि कंज्यूमर हेल्थकेयर डिवीजन Bayer से होने वाले नुकसान की भरपाई कितनी तेजी से कर पाती है और वैकल्पिक सप्लाई चेन सेटअप करने का मार्जिन पर क्या असर पड़ता है।
