बच्चों के टीके होंगे कम? PhRMA ने अमेरिकी सरकार के फैसले का किया विरोध

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
बच्चों के टीके होंगे कम? PhRMA ने अमेरिकी सरकार के फैसले का किया विरोध

अमेरिका में बच्चों के वैक्सीनेशन शेड्यूल को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। 10 अगस्त, 2026 को जारी एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के तहत, बच्चों को लगने वाले टीकों की संख्या 18 से घटाकर 11 करने की योजना है। हालांकि, फार्मास्युटिकल कंपनियों के संगठन PhRMA ने इस कदम का कड़ा विरोध किया है और चेतावनी दी है कि इससे सुरक्षा मानकों में गिरावट आ सकती है।

अमेरिकी सरकार का नया फरमान

10 अगस्त, 2026 को अमेरिका सरकार ने 'डेलीवरिंग गोल्ड स्टैंडर्ड चाइल्डहुड वैक्सीन रिकमेन्डेशन्स फॉर अमेरिकन्स' नाम से एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी किया है। इस नई नीति का मकसद राष्ट्रीय बचपन टीकाकरण कार्यक्रम में बदलाव लाना है, जिसके तहत रूटीन टीकों की संख्या को 18 से घटाकर 11 कर दिया जाएगा। इस ऑर्डर में टीकों को एक साथ लगाने के बजाय अलग-अलग मेडिकल विज़िट्स में देने को भी बढ़ावा दिया गया है, साथ ही ज़्यादा चुनिंदा टीकाकरण प्रोटोकॉल पर जोर दिया गया है।

PhRMA का तीखा विरोध

इस नीतिगत बदलाव का फार्मास्युटिकल रिसर्च एंड मैन्युफैक्चरर्स ऑफ अमेरिका (PhRMA) ने तुरंत विरोध किया है। PhRMA के चीफ मेडिकल ऑफिसर, डॉ. माइकल याबरा ने सार्वजनिक रूप से चेतावनी दी है कि बिना व्यापक वैज्ञानिक प्रमाण के टीकों के शेड्यूल को कम करने से गंभीर, जानलेवा बीमारियों के खिलाफ सुरक्षा मानकों में कमी आ सकती है। संगठन का तर्क है कि मौजूदा विस्तृत शेड्यूल अमेरिकी आबादी की ज़रूरतों के अनुसार दशकों के डेटा पर आधारित है, और बिना किसी तुलनीय सबूत के इससे हटना अनावश्यक जोखिम पैदा करता है।

मेडिकलAssociations की चिंताएं

सिर्फ उद्योग प्रतिनिधियों से ही नहीं, बल्कि प्रमुख मेडिकल Associations ने भी इस एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर चिंता जताई है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (AAP), नेशनल मेडिकल एसोसिएशन (NMA), और सोसाइटी फॉर मैटर्नल-फीटल मेडिसिन (SMFM) जैसे संगठनों ने सार्वजनिक रूप से अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। ये समूह इस बात पर जोर देते हैं कि टीकों को अलग-अलग करने और मेडिकल विज़िट्स की संख्या बढ़ाने की सिफारिश परिवारों के लिए लॉजिस्टिकल बाधाएं खड़ी कर सकती है। विशेषज्ञों को डर है कि इससे अपॉइंटमेंट्स छूट सकते हैं, टीकाकरण कवरेज कम हो सकता है, और स्थापित स्वास्थ्य दिशानिर्देशों में जनता का विश्वास कमज़ोर पड़ सकता है।

निवेशकों के लिए क्या है मायने?

वैश्विक फार्मास्युटिकल और हेल्थकेयर सेक्टर में निवेशकों के लिए, यह घटना अमेरिका जैसे प्रमुख बाजारों में रेगुलेटरी और पॉलिसी अनिश्चितता के लगातार जोखिम को उजागर करती है। हालांकि फार्मा इंडस्ट्री पहले से ही बढ़ती कच्चे माल की लागत, सप्लाई चेन की जटिलताओं और मार्जिन दबाव जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है, यह नीतिगत बदलाव टीकों के विपणन, वितरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में प्राथमिकता को लेकर जटिलताएं पैदा करता है।

टीकाकरण के लिए अलग मेडिकल विज़िट्स की ओर बढ़ने से स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों के लिए प्रशासनिक लागत बढ़ सकती है। यदि यह लागू होता है और टीकाकरण की दर कम होती है, तो यह कुछ निवारक देखभाल उत्पादों की मांग को प्रभावित कर सकता है। निवेशक और उद्योग विश्लेषक इस बात पर नज़र रखेंगे कि संघीय एजेंसियां इन नए आदेशों को मौजूदा सार्वजनिक स्वास्थ्य सिफारिशों के साथ कैसे सुलझाती हैं। हितधारकों के लिए मुख्य चिंता यह है कि क्या नीति में बदलाव से एक खंडित स्वास्थ्य सेवा परिदृश्य बनेगा जो उत्पाद वितरण को जटिल बनाएगा या टीकाकरण के उत्पादन और वितरण में शामिल कंपनियों के लिए परिचालन अक्षमता पैदा करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.