Peptris के लिए यह एक बड़ी कामयाबी है। कंपनी ने ₹70 करोड़ (लगभग $7.7 मिलियन) की सीरीज A फंडिंग जुटाई है, जो AI की मदद से नई दवाएं खोजने के क्षेत्र में उसके प्रयासों को और तेज करेगी।
यह फंड IAN Alpha Fund और Speciale Invest की अगुआई में आया है। इससे Peptris अपने AI मॉडल को और बेहतर बनाएगी और दवा विकास के शुरुआती चरणों (प्रीक्लिनिकल स्टेज) में आने वाली बड़ी बाधाओं को दूर करने की कोशिश करेगी। कंपनी का लक्ष्य दवा खोज की प्रक्रिया को सस्ता और तेज बनाना है, साथ ही फेल होने की दर को कम करना है।
यह फंडिंग ऐसे समय में आई है जब दुनिया भर में फार्मा R&D में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। अनुमान है कि 2030 तक AI इन ड्रग डिस्कवरी का बाजार $9 बिलियन तक पहुंच जाएगा। Peptris इस फंड का उपयोग अपने AI मॉडल को परिष्कृत करने के लिए करेगी, जो नई दवा के अणुओं (molecules) को बनाने और उनके विकास की भविष्यवाणी करने में मदद करते हैं। प्रीक्लिनिकल स्टेज में दवाएं फेल होने की दर बहुत ज्यादा होती है – केवल 6.7% दवाएं ही फेज़ 1 ट्रायल से अप्रूवल तक पहुंच पाती हैं। Peptris इसी स्टेज को सुधारने पर फोकस कर रही है।
भारत का बायोटेक सेक्टर भी तेजी से बढ़ रहा है और 2030 तक $300 बिलियन का होने की उम्मीद है। Peptris जैसी कंपनियां इस बढ़ते सेक्टर में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इस ₹70 करोड़ की फंडिंग से यह साफ है कि निवेशक उन कंपनियों में पैसा लगाने को तैयार हैं जो टेक्नोलॉजी के जरिए इंडस्ट्री की पुरानी समस्याओं को हल कर सकती हैं।
हालांकि, दवा खोज का रास्ता आसान नहीं है। प्रीक्लिनिकल स्टेज में वैज्ञानिक अनिश्चितताएं और विफलता की उच्च दर एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। AI के मॉडल कितने सटीक होंगे और वे जैविक जटिलताओं को कितनी अच्छी तरह समझ पाएंगे, यह देखना बाकी है। कंपनी का B2B मॉडल भी बड़े पार्टनर्स की रणनीतियों पर निर्भर करेगा।
अगले 24 महीनों में Peptris अपने प्रमुख कार्यक्रमों को क्लिनिकल ट्रायल के करीब ले जाने और अपनी दवा खोज पाइपलाइन का विस्तार करने पर ध्यान केंद्रित करेगी। कंपनी नई दवाएं (NCE programs) विकसित करने और मौजूदा दवाओं के नए उपयोग खोजने (drug repurposing) की भी योजना बना रही है। AI, डेटा साइंस और केमिस्ट्री टीमों को मजबूत करना भी उनकी प्राथमिकता होगी।