Park Medi World ने अपनी क्षमता का विस्तार करने का फैसला किया है। कंपनी FY28 तक अपने नेटवर्क में 1,450 नए बेड जोड़ेगी। हालांकि शानदार मुनाफे के बावजूद, सरकारी योजनाओं पर भारी निर्भरता एक चिंता का विषय बनी हुई है।
विस्तार की आक्रामक रणनीति
उत्तर भारत की दूसरी सबसे बड़ी प्राइवेट हॉस्पिटल चेन, Park Medi World अब अपने नेटवर्क को और मजबूत करने की तैयारी में है। कंपनी की योजना FY28 के अंत तक अपनी मौजूदा 4,290 बेड की क्षमता में 1,450 बेड का इजाफा करने की है। कंपनी का फोकस अब टियर-2 और टियर-3 शहरों पर है, जहां मेडिकल सेवाओं की बढ़ती मांग और लोगों की खर्च करने की क्षमता (डिस्पोजेबल इनकम) में सुधार देखा जा रहा है।
अधिग्रहण (Acquisition) पर दांव
कंपनी नए अस्पताल बनाने के बजाय पहले से मौजूद अस्पतालों को खरीदने की रणनीति अपना रही है। आमतौर पर 200 से 250 बेड वाले अस्पतालों का अधिग्रहण कर उन्हें 350 बेड की क्षमता तक पहुंचाने का लक्ष्य है। इससे कंपनी को कम समय में स्थानीय बाजार में बड़ी हिस्सेदारी हासिल करने में मदद मिलेगी।
शानदार फाइनेंशियल परफॉर्मेंस और चुनौतियां
FY26 में कंपनी ने ₹273.6 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जबकि रेवेन्यू ₹1,679.4 करोड़ रहा। लेकिन एक बड़ा रिस्क यह है कि कंपनी का 83% रेवेन्यू सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं और पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (PSU) से आता है। भुगतान में देरी या सरकारी पॉलिसी में बदलाव सीधे कंपनी के कैश फ्लो पर असर डाल सकता है।
इसके अलावा, हरियाणा के बाजार पर अत्यधिक निर्भरता और कुशल डॉक्टरों की टीम को बनाए रखना भी कंपनी के लिए एक बड़ी चुनौती है। निवेशकों को आने वाले समय में बेड बढ़ाने की रफ्तार और सरकारी भुगतान चक्र (Payment Cycle) पर नजर बनाए रखनी होगी।
