ऑक्सफोर्ड का नया स्टेटिन रिस्क टूल: लाखों मरीज़ों के लिए वरदान, इन दवाओं को अपनाने की दर बढ़ सकती है

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
ऑक्सफोर्ड का नया स्टेटिन रिस्क टूल: लाखों मरीज़ों के लिए वरदान, इन दवाओं को अपनाने की दर बढ़ सकती है

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने स्टेटिन (Statin) दवाओं के इस्तेमाल से होने वाली मांसपेशियों की गंभीर बीमारियों के जोखिम का पता लगाने के लिए एक टूल विकसित किया है। यह पर्सनलाइज्ड सेफ्टी डेटा देकर उन लाखों मरीज़ों की हिचकिचाहट को दूर करने में मदद करेगा जो कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली इन दवाओं से बचते हैं।

क्या हुआ?

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने स्टेटिन (Statin) दवाएं लेने वाले मरीज़ों में गंभीर मांसपेशियों की बीमारियों के जोखिम का अनुमान लगाने के लिए एक खास कैलकुलेटर लॉन्च किया है। स्टेटिन, हाई कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने और दिल की बीमारियों से बचाने के लिए सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाली दवाओं में से हैं। यूनिवर्सिटी के नुफील्ड डिपार्टमेंट ऑफ प्राइमरी केयर हेल्थ साइंसेज (Nuffield Department of Primary Care Health Sciences) द्वारा विकसित यह नया टूल, क्लिनिकल मॉडल का इस्तेमाल करके पर्सनलाइज्ड रिस्क एस्टीमेट्स (personalized risk estimates) देता है। यह उम्र, पहले से मौजूद बीमारियों और दवाओं के इतिहास जैसे 22 अलग-अलग हेल्थ फैक्टर्स का विश्लेषण करके, व्यक्तिगत मरीज़ों के लिए साइड इफेक्ट्स की संभावना का 10-साल का आउटलुक बताता है।

मरीज़ों और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए क्यों ज़रूरी?

स्टेटिन दिल के दौरे और स्ट्रोक के जोखिम को कम करने के लिए ज़रूरी हैं, लेकिन इनके साइड इफेक्ट्स को लेकर अक्सर जनता में हिचकिचाहट रहती है। शोध के अनुसार, स्टेटिन थेरेपी के लिए मेडिकली एलिजिबल (medically eligible) लोगों में से 60% से ज़्यादा लोग वर्तमान में इन्हें नहीं ले रहे हैं। यह ट्रीटमेंट गैप (treatment gap) अक्सर मांसपेशियों से जुड़ी समस्याओं की चिंताओं के कारण होता है। यह टूल इस गैप को पाटने का लक्ष्य रखता है, यह दिखाकर कि एलिजिबल व्यक्तियों में से 98% से ज़्यादा के लिए, गंभीर मांसपेशियों की जटिलताओं का जोखिम बहुत कम है। दिल के स्वास्थ्य की मौजूदा कैलकुलेटर्स के साथ इन जोखिमों को मापने से, डॉक्टरों को मरीज़ों को आश्वस्त करने में आसानी हो सकती है, जिससे दवा अपनाने की दरें बढ़ सकती हैं।

टूल के पीछे का डेटा

इस मॉडल को इंग्लैंड भर के 5.6 मिलियन से ज़्यादा लोगों के गुमनाम हेल्थ रिकॉर्ड का उपयोग करके बनाया गया है, जो इसे एक मज़बूत क्लिनिकल रिसोर्स बनाता है। यह बॉडी मास इंडेक्स (body mass index), स्मोकिंग स्टेटस (smoking status), एथ्निसिटी (ethnicity) और विटामिन डी लेवल (vitamin D levels) जैसे डेटा पॉइंट्स का मूल्यांकन करता है। यह डेटा-संचालित दृष्टिकोण, साइड इफेक्ट्स के सामान्य डर से हटकर, व्यक्ति की विशिष्ट हेल्थ प्रोफाइल के आधार पर पर्सनलाइज्ड मूल्यांकन की ओर ले जाता है।

बिज़नेस और सेक्टर का संदर्भ

फार्मास्युटिकल कंपनियों (pharmaceutical companies) और हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (healthcare providers) के लिए, इस ट्रीटमेंट गैप को दूर करना एक महत्वपूर्ण कमर्शियल और पब्लिक हेल्थ ऑब्जेक्टिव (public health objective) है। स्टेटिन की सुरक्षा में बढ़ा हुआ भरोसा प्रिस्क्रिप्शन वॉल्यूम (prescription volumes) और कार्डियोवैस्कुलर ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल (cardiovascular treatment protocols) के व्यापक पालन को बढ़ा सकता है। हालाँकि यह कैलकुलेटर एक कमर्शियल प्रोडक्ट (commercial product) के बजाय एक क्लिनिकल डेवलपमेंट (clinical development) है, पर्सनलाइज्ड मेडिसिन (personalized medicine) की ओर यह कदम एक बढ़ता हुआ ट्रेंड है जो यह प्रभावित करता है कि हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स ट्रीटमेंट को कैसे प्राथमिकता देते हैं। यदि इसे क्लिनिकल प्रैक्टिस (clinical practice) में सफलतापूर्वक एकीकृत किया जाता है, तो ऐसे टूल स्थापित कोलेस्ट्रॉल दवाओं की मांग को स्थिर कर सकते हैं, जिससे गलत चिंताओं के कारण उपचार बंद करने वाले मरीज़ों की संख्या कम हो जाएगी।

आगे क्या देखना है?

हेल्थकेयर सेक्टर (healthcare sector) में निवेशकों (investors) और स्टेकहोल्डर्स (stakeholders) इस बात पर नज़र रख सकते हैं कि यह टूल सामान्य मेडिकल प्रैक्टिस (medical practice) और इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड सिस्टम (electronic health record systems) में कितनी तेज़ी से एकीकृत होता है। मुख्य बात यह देखनी होगी कि क्या क्लीनिशन (clinicians) प्राइमरी केयर सेटिंग्स (primary care settings) में स्टेटिन अपटेक रेट (statin uptake rates) को बेहतर बनाने के लिए इस पर्सनलाइज्ड असेसमेंट (personalized assessment) का उपयोग करना शुरू करते हैं। इसके अतिरिक्त, कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली थेरेपीज़ (cholesterol-lowering therapies) में भविष्य के एडॉप्शन ट्रेंड्स (adoption trends) इस बात के प्रमुख संकेतक होंगे कि क्या ऐसा क्लिनिकल गाइडेंस (clinical guidance) मरीज़ों के व्यवहार को सफलतापूर्वक बदलता है।

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