Diagnostics स्टार्टअप Orange Health Labs अब रेडियोलॉजी सेगमेंट में कदम रखने जा रही है। FY26 में कंपनी का रेवेन्यू **65%** बढ़कर **₹138.6 करोड़** रहा, लेकिन नेट लॉस **₹146 करोड़** दर्ज किया गया। कंपनी अब **$3 करोड़** की फंडिंग जुटाने की कोशिश में है।
बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव
Orange Health Labs अब पैथोलॉजी के दायरे से बाहर निकलकर रेडियोलॉजी सेक्टर में अपनी पैठ जमाने की तैयारी कर रही है। कंपनी का मकसद केवल घर पर टेस्ट देने वाली सेवा तक सीमित न रहकर, अब फिजिकल डायग्नोस्टिक सेंटर का हाइब्रिड मॉडल अपनाना है, ताकि इमेजिंग सर्विसेज को भी पोर्टफोलियो में जोड़ा जा सके।
फाइनेंशियल हेल्थ और चुनौतियां
कंपनी के लिए FY26 का फाइनेंशियल ईयर मिले-जुले नतीजे लेकर आया है। जहां रेवेन्यू में 65% की उछाल के साथ यह ₹138.6 करोड़ पर पहुंच गया, वहीं दूसरी ओर घाटा बढ़कर ₹146 करोड़ हो गया है। कंपनी का EBITDA लॉस ₹92.4 करोड़ रहा, जो तेजी से बढ़ते खर्चों की ओर इशारा करता है।
नई फंडिंग और विस्तार
अपने इस विस्तार के लिए कंपनी Iron Pillar के नेतृत्व में $3 करोड़ की Series C फंडिंग जुटाने की प्रक्रिया में है। इस पूंजी का इस्तेमाल साल 2026 के अंत तक 150 से 200 फिजिकल सेंटर खोलने में किया जाएगा।
प्रतिस्पर्धा और जोखिम
यह नया मॉडल काफी 'कैपिटल-इंटेंसिव' है, जिसमें भारी निवेश और रियल एस्टेट की जरूरत होगी। इसके साथ ही, कंपनी का मुकाबला अब Dr. Lal PathLabs, Healthians और Redcliffe Labs जैसे दिग्गजों से होगा। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या फिजिकल सेंटर उसी तरह से ब्रेक-ईवन (Break-even) हासिल कर पाते हैं जैसे कंपनी के मौजूदा एट-होम यूनिट्स ने किए हैं।
