Omron Corporation के CEO जुंटा त्सुजिनागा ने स्पष्ट किया है कि Apple Watch जैसे वियरेबल्स केवल वेलनेस के लिए हैं, मेडिकल डायग्नोसिस के लिए नहीं। कंपनी चेन्नई में नए प्लांट के साथ अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ा रही है।
क्लिनिकल वैलिडेशन ही असली ताकत
जुंटा त्सुजिनागा के मुताबिक, असली अंतर रेगुलेटरी मंजूरी और सटीकता का है। Apple को भले ही हाइपरटेंशन नोटिफिकेशन के लिए FDA की मंजूरी मिली हो, लेकिन इसे केवल एक नोटिफिकेशन सिस्टम माना जाता है। वहीं, Omron के मॉनिटर्स यूरोपीय और अमेरिकी मेडिकल संस्थानों के सख्त मानकों पर खरे उतरते हैं। डॉक्टर्स इलाज के लिए Omron के डेटा पर भरोसा करते हैं, जो कंपनी की सबसे बड़ी ताकत है। दिलचस्प बात यह है कि Apple ने अपने खुद के हेल्थ-ट्रैकिंग फीचर्स को वैलिडेट करने के लिए Omron के Evolv मॉनिटर को ही बेंचमार्क के तौर पर इस्तेमाल किया था।
भारत में मैन्युफैक्चरिंग का विस्तार
Omron अपनी सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए चेन्नई में नई यूनिट शुरू कर चुकी है। कंपनी का लक्ष्य 2028 तक सालाना 30 लाख ब्लड प्रेशर मॉनिटर बनाने का है। भारत अब कंपनी के लिए एक प्रमुख ग्लोबल हब बन चुका है।
इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन की ओर बड़ा कदम
हेल्थकेयर में लगभग $1 बिलियन की सेल के बावजूद, Omron अब इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन में बड़े बदलाव कर रही है। कंपनी ने $675 मिलियन में अमेरिका की OnLogic को खरीदा है, ताकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और इंडस्ट्रियल कंप्यूटिंग को फैक्ट्री सेटअप में जोड़ा जा सके।
निवेशकों के लिए क्या है रिस्क?
निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी होगी कि कंपनी कैसे मेडिकल और इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन के बीच संतुलन बनाती है। हालांकि मेडिकल बिजनेस क्लिनिकल सेटिंग्स में हावी है, लेकिन सस्ते वियरेबल्स का मार्केट नॉन-क्लिनिकल सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा बढ़ा सकता है। इसके अलावा, कच्चे माल की बढ़ती लागत और लॉजिस्टिक्स का असर मुनाफे (Profit Margin) पर पड़ सकता है, जिस पर सावधानी से नजर रखना जरूरी है।
