अमेरिका से अब दुनिया की ओर
मोटापा कम करने वाली ब्लॉकबस्टर दवाओं का कॉम्पिटिशन अब एक नए मोड़ पर आ गया है। जहां पहले अमेरिका इन दवाओं के लिए सबसे बड़ा बाजार था, वहीं अब Eli Lilly और Novo Nordisk जैसी बड़ी कंपनियां लंबी अवधि की ग्रोथ के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। अमेरिका में बाजार के संतृप्त (Saturated) होने और कीमतों पर बढ़ते दबाव के चलते, यह कदम रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
ओरल दवाओं पर Eli Lilly का जोर
Eli Lilly अपनी ओरल (मुंह से ली जाने वाली) मोटापे की दवा के लिए कई देशों में एक साथ फाइलिंग की रणनीति अपना रही है। इसका मकसद उन सप्लाई की दिक्कतों से बचना है जो पहले उनकी इंजेक्टेबल दवाओं के साथ आई थीं। कंपनी वैश्विक पहुंच को प्राथमिकता देकर GLP-1 स्पेस में अपनी लीडरशिप बनाए रखना चाहती है।
दूसरी ओर, Novo Nordisk अपनी ग्लोबल लॉन्चिंग को लेकर थोड़ा संभलकर चल रही है। वे मांग को पूरी तरह से पूरा करने पर ध्यान दे रहे हैं ताकि अमेरिका में उनके शुरुआती प्रदर्शन की तरह लॉजिस्टिक्स की समस्याएं न हों। Novo Nordisk का फोकस डायबिटीज केयर में अपनी मजबूत पकड़ का फायदा उठाकर UAE और यूरोप जैसे उभरते बाजारों में अपनी ओरल सेमाग्लूटाइड (Oral Semaglutide) की बिक्री बढ़ाना है।
वित्तीय स्थिति में बड़ा अंतर
बाजार के आंकड़ों से पता चलता है कि दोनों कंपनियों की वित्तीय स्थिति में काफी अंतर है। Eli Lilly को अभी भी निवेशकों का मजबूत भरोसा हासिल है, जिनकी नजर में कंपनी अमेरिकी नियमों के जोखिमों से निपट सकती है। वहीं, Novo Nordisk को 2026 में अपनी कमाई के अनुमानों में कटौती के कारण स्टॉक में दबाव का सामना करना पड़ा है। डेनिश कंपनी इस समय एक मुश्किल दौर से गुजर रही है, क्योंकि उनकी मुख्य दवा Wegovy को अमेरिकी बाजार में मूल्य दबाव का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनके P/E रेशियो में कमी आई है। जहां Eli Lilly की आय में डबल-डिजिट ग्रोथ का अनुमान है, वहीं Novo Nordisk को पेटेंट की समाप्ति और कम लागत वाले जेनेरिक विकल्पों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।
जेनेरिक दवाओं का खतरा
वैश्विक विस्तार की उम्मीदों के बावजूद, दोनों कंपनियों के सामने बड़े खतरे मंडरा रहे हैं। भारत और ब्राजील जैसे मूल्य-संवेदनशील बाजारों में जेनेरिक सेमाग्लूटाइड (Generic Semaglutide) और टिरज़ेपाटाइड (Tirzepatide) की प्रतिस्पर्धा उनके मूल्य निर्धारण की शक्ति को कमजोर कर सकती है। इसके अलावा, Novo Nordisk 2025 में बिक्री के लक्ष्य को पूरा करने में विफल रहने के बाद निवेशकों का भरोसा फिर से हासिल करने के लिए संघर्ष कर रहा है। Eli Lilly काफी हद तक अपनी कार्डियोमेटाबोलिक दवाओं पर निर्भर है, जिससे एक तरह का एकाग्रता जोखिम (Concentration Risk) पैदा होता है। साथ ही, दवाओं की कीमतों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी एक बड़ा अनिश्चितता का कारण बनी हुई है।
भविष्य का नज़रिया
इन फार्मा दिग्गजों की दीर्घकालिक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे वॉल्यूम ग्रोथ और कीमतों को बनाए रखने के बीच संतुलन कैसे बनाते हैं। विश्लेषकों को ओरल फॉर्मूलेशन की मांग बढ़ने की उम्मीद है, जिससे लाखों मरीजों के लिए इन दवाओं तक पहुंच आसान हो जाएगी। हालांकि, इसके लिए विदेशी सरकारों के साथ सफलतापूर्वक बातचीत करके रीइम्बर्समेंट (Reimbursement) हासिल करना होगा, जो कि अमेरिका की केंद्रीकृत प्रणाली की तुलना में कहीं अधिक जटिल साबित होगा।
