Nucelion Therapeutics और Pandorum Technologies ने आंखों की बीमारियों के लिए एक खास जीन थेरेपी प्रोजेक्ट शुरू किया है। इस **₹17 करोड़** के प्रोजेक्ट में सरकार की PRIP स्कीम के तहत **₹8 करोड़** की मदद भी शामिल है।
रिसर्च और साझेदारी का तालमेल
हैदराबाद की Nucelion Therapeutics और बेंगलुरु की Pandorum Technologies ने आंखों की गंभीर बीमारियों, जैसे एडवांस्ड केराटोपैथी और वेट AMD के इलाज के लिए हाथ मिलाया है। इस ₹17 करोड़ के प्रोजेक्ट का मकसद लैबोरेटरी रिसर्च और क्लिनिकल ट्रायल्स के बीच की दूरी को कम करना है।
इस प्रोजेक्ट को भारत सरकार की Promotion of Research and Innovation in Pharma Medtech (PRIP) स्कीम का बड़ा सपोर्ट मिला है, जिसके तहत ₹8 करोड़ की फंडिंग दी गई है। यह कदम भारतीय फार्मा सेक्टर को जेनेरिक दवाओं से आगे बढ़ाकर हाई-वैल्यू इनोवेशन की ओर ले जाने की कोशिश है।
कैसे काम करेंगी ये कंपनियां?
साझेदारी के तहत, Pandorum अपनी 'डिजाइनर एक्सोसोम' (designer exosomes) तकनीक का इस्तेमाल करेगी, जो सेलुलर कम्युनिकेशन में मदद करती है। वहीं, Nucelion बतौर CDMO (कॉन्ट्रैक्ट डेवलपमेंट एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑर्गनाइजेशन) प्रोडक्शन प्रोसेस और GMP स्टैंडर्ड्स का जिम्मा संभालेगी, जो कि ह्यूमन क्लिनिकल ट्रायल्स के लिए अनिवार्य हैं।
निवेशकों के लिए रिस्क और चुनौतियां
बायोटेक सेक्टर में निवेश का मतलब है भारी पूंजी और लंबा इंतजार। जीन थेरेपी जैसे प्रोजेक्ट्स में क्लिनिकल ट्रायल्स लंबे होते हैं और सफलता की गारंटी कम रहती है। भले ही सरकारी फंडिंग से एक वित्तीय सुरक्षा मिली है, लेकिन CDSCO की मंजूरी और रेगुलेटरी बाधाएं पार करना एक बड़ी चुनौती होगी। निवेशकों की नजरें अब प्री-क्लिनिकल स्टडीज और ट्रायल के रिजल्ट्स पर टिकी होंगी, क्योंकि यही इस स्टार्टअप्स की आगे की ग्रोथ तय करेंगे।
