Novo Nordisk AI का इस्तेमाल कर भारत से दवाओं की लॉन्चिंग में लगा रहा है तेज़ी!

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AuthorAditya Rao|Published at:
Novo Nordisk AI का इस्तेमाल कर भारत से दवाओं की लॉन्चिंग में लगा रहा है तेज़ी!
Overview

Novo Nordisk अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके नई दवाओं को मार्केट में लाने का समय काफी कम कर रहा है। कंपनी का बेंगलुरु स्थित सेंटर अब ग्लोबल लॉन्च के लिए एक महत्वपूर्ण हब बन गया है, खासकर अमेरिका में लॉन्च होने वाली मोटापे की दवा के लिए। AI से यह प्रक्रिया महीनों तक छोटी हो जाएगी, जो इंडस्ट्री के बाकी खिलाड़ियों से अलग है।

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AI से दवा अप्रूवल में तेज़ी

Novo Nordisk नई दवाओं को मार्केट में लाने में लगने वाले समय को काफी हद तक कम कर रहा है। कंपनी का लक्ष्य अंतिम पेशेंट विजिट और शुरुआती रेगुलेटरी फाइलिंग के बीच लगने वाले आम 18 महीनों के समय में से महीनों को बचाना है। यह तेज़ी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके रेगुलेटरी डॉक्यूमेंट्स लिखने, सेफ्टी डेटा का विश्लेषण करने और कमर्शियल एनालिसिस जैसे कामों के ज़रिए हासिल की जा रही है।

AI के रणनीतिक इस्तेमाल से, Novo Nordisk न केवल अपनी मौजूदा दवाओं को बेहतर बना रहा है, बल्कि भविष्य की दवाओं के लिए अपनी पाइपलाइन को भी मज़बूत कर रहा है। यह कदम फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री में AI को अपनाने के सामान्य ट्रेंड के अनुरूप है, जिसका मकसद रिसर्च और डेवलपमेंट को तेज़ करना, एफिशिएंसी बढ़ाना और लागत को कंट्रोल करना है। एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि AI शुरुआती चरण के ड्रग डेवलपमेंट के समय को आधा कर सकता है।

भारत का सेंटर बना ग्लोबल लॉन्च हब

कंपनी का बेंगलुरु, भारत स्थित सेंटर ग्लोबल ड्रग लॉन्च की तैयारी के लिए एक महत्वपूर्ण लोकेशन बन गया है। यहां प्री-लॉन्च गतिविधियों का बढ़ता हुआ काम संभाला जाता है, जिसमें हाल ही में अमेरिका में लॉन्च हुई ओरल ओबेसिटी पिल की तैयारी भी शामिल है। कंपनी के एक प्रतिनिधि ने बताया कि दुनिया भर में ज़्यादातर मेडिसिन लॉन्च में बेंगलुरु फैसिलिटी का कुछ न कुछ योगदान रहा है।

क्लिनिकल डेटा की व्याख्या करना, रेगुलेटरी सबमिशन को मैनेज करना और कमर्शियल स्ट्रेटेजी विकसित करना जैसे मुख्य फंक्शन भारत से ज़्यादा से ज़्यादा संभाले जा रहे हैं। यह हब Novo Nordisk को ग्लोबल मार्केट्स तक पहुंचने के लिए महत्वपूर्ण बनाता है।

रीस्ट्रक्चरिंग और टारगेटेड हायरिंग

अपनी AI क्षमताओं का विस्तार करते हुए, Novo Nordisk एक बड़े रीस्ट्रक्चरिंग से भी गुज़र रहा है और अपनी हायरिंग स्ट्रेटेजी पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। ग्लोबल बिज़नेस सर्विसेज़ यूनिट में इस साल के अंत तक लगभग 4,000 कर्मचारी होने की उम्मीद है। यह 2025 तक 5,000 के पिछले अनुमान से कमी है, क्योंकि पहले के लक्ष्य "बहुत ज़्यादा महत्वाकांक्षी" माने गए थे।

कंपनी व्यापक रूप से कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने के बजाय, अपने AI-संचालित ऑपरेशंस का समर्थन करने के लिए आवश्यक विशिष्ट भूमिकाओं के लिए स्पेशलाइज्ड टैलेंट को हायर करने को प्राथमिकता दे रही है।

कॉम्पिटिटिव एज हासिल करना

Novo Nordisk का AI का सक्रिय उपयोग इसे कई प्रतिस्पर्धियों से आगे रखता है जो इसी तरह की टेक्नोलॉजीज़ पर काम कर रहे हैं। जबकि फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री AI से महत्वपूर्ण एफिशिएंसी लाभ की उम्मीद करती है, Novo Nordisk का शुरुआती और व्यापक कार्यान्वयन, विशेष रूप से इसके भारत हब के माध्यम से, नई थेरेपी को तेज़ी से मार्केट में लाने में एक एडवांटेज दे सकता है। इससे तेज़ी से रेवेन्यू जनरेशन हो सकता है और मोटापे और डायबिटीज जैसे क्षेत्रों में एक मज़बूत पोजीशन मिल सकती है। हालांकि, इन टाइमलाइन्स को प्राप्त करना AI मॉडल्स की निरंतर सटीकता और बदलते ग्लोबल रेगुलेशन के साथ उनके स्मूथ इंटीग्रेशन पर निर्भर करेगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.